नेता प्रतिपक्ष पद के लिए घमासान, कांग्रेस ने कराई रायशुमारी

नेता प्रतिपक्ष पद के लिए घमासान, कांग्रेस ने कराई रायशुमारी

Jeevendra Jha | Updated: 06 Oct 2019, 11:57:36 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

Karnataka Congress : अधिकांश विधान मंडल सदस्यों ने विधायक दल के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को अलग नहीं करने का सुझाव भी दिया। सिद्धरामय्या विरोधी खेमा दोनों पदों को अलग-अलग करने की मांग का समर्थन कर रहा है।

बेंगलूरु. विधानमंडल के दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर कांग्रेस ने रविवार को राष्ट्रीय महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने एक होटल में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के अलावा पूर्व मंत्री एच के पाटिल और पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर भी इस पद के दावेदार हैं। मिस्त्री ने सिद्धरामय्या, पाटिल और परमेश्वर से अलग-अलग मुलाकात की। जिस होटल में बैठक हो रही थी वहीं सिद्धू समर्थक विधायकों ने भी अलग बैठक की। सिद्धरामय्या ने भी एम बी पाटिल, एच सी महादेवप्पा, रिजवान अरशद और नरेंद्र स्वामी आदि के साथ बैठक की।

नेता प्रतिपक्ष पद के लिए घमासान, कांग्रेस ने कराई रायशुमारी

सिद्धू का पलड़ा भारी!
पार्टी सूत्रों के मुताबिक विपक्ष नेता पद के लिए सिद्धरामय्या का पलड़ा भारी रहा है। विधायकों और विधान पार्षदों के बड़े समूह ने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सिद्धरामय्या का समर्थन किया है जबकि पाटिल और परमेश्वर को काफी काम नेताओं का समर्थन मिला। अधिकांश विधान मंडल सदस्यों ने विधायक दल के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को अलग नहीं करने का सुझाव भी दिया। सिद्धरामय्या विरोधी खेमा दोनों पदों को अलग-अलग करने की मांग का समर्थन कर रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि 66 में से 57 विधायकों और 38 में से 30 विधान पार्षदों ने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सिद्धरामय्या का समर्थन किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अधिकांश विधायकों की राय है कि फिलहाल सिद्धरामय्या का कोई विकल्प नहीं है। एक नेता ने कहा कि भाजपा से मोर्चा लेने के लिए अभी सिर्फ सिद्धरामय्या ही मजबूत नेता हैं। एक अन्य नेता ने कहा कि कुछ वरिष्ठ नेता एक ही व्यक्ति के वर्चस्व के खिलाफ हैं जबकि कुछ नेता सिद्धू और पाटिल दोनों के खिलाफ हैं। एक नेता ने कहा कि हम पार्टी के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, किसी एक व्यक्ति की नहीं।
गठबंधन सरकार के पतन के बाद से अयोग्य ठहराए गए 17 विधायकों में से कई के सिद्धू के करीबी होने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी और जद-एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा लगातार सिद्धरामय्या के खिलाफ हमलावर रहे हैं। सिद्धू समर्थकों को उम्मीद है कि वे एक बार फिर अपने विरोधियों को मात देने में सफल रहेगे जबकि विरोधियों का कहना है कि अगर पूर्व मंत्री डी के शिवकुमार को धन शोधन मामले में गिरफ्तार नहीं हुए होते तो स्थिति कुछ और होती। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि विपक्ष के नेता पद को लेकर आलाकमान मंगलवार तक को निर्णय लेगा।

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