डीके शिवकुमार के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की पूरी उम्मीद

सिद्धरामय्या बने रहेंगे कांग्रेस विधायक दल के नेता

बेंगलूरु.
राजनीतिक समीकरणों को साधने के फेर में दो महीने बाद भी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं कर पाई है। सोमवार से विधानमंडल का बजट अधिवेशन भी शुरु हो रहा है लेकिन कांग्रेस विधायक दल व विधानसभा में विपक्ष नेता पद से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के त्याग-पत्र को लेकर भी स्थिति भी साफ नहीं है।
हालांकि,सूत्रों का कहना है कि राज्य के दो प्रमुख समुदायों लिंगायत और वोक्कालिगा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कांग्रेस पूर्व जलसंसाधन मंत्री डीके शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री एमबी पाटिल को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर सकती है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या कांगे्रस विधायक दल के नेता बने रहेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद तब से ही खाली पड़ा है जब से दिनेश गुंडूराव ने उपचुनावों में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 15 में 12 सीटें जीत ली थी जबकि कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में ही सफल रही थी। भाजपा ने जो सीटें जीती वह सभी कांग्रेस के नाम ही थी।
इस बीच कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले और बड़े वोक्कालिगा नेता डीके शिवकुमार ने पार्टी आलाकमान के साथ मिलकर प्रदेश अध्यक्ष पद की जोरदार लाबिंग की। हालांकि, डीके शिवकुमार का चेहरा विवादास्पद है क्योंकि उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला चल रहा है और वे जमानत पर हैं। लेकिन, कठिन परिस्थितियों से हमेशा पार्टी को निकालने वाले डीके शिवकुमार की लाबिंग इस बार कामयाब होती नजर आ रही है। दूसरी ओर पूर्व गृह मंत्री और लिंगायत नेता एम बी पाटिल सिद्धरामय्या की पहली पसंद हैं।
हालांकि, पार्टी का कोई भी नेता ऑन रिकॉर्ड कुछ कहने को तैयार नहीं है लेकिन, सिद्धरामय्या सरकार में मंत्री रहे एक नेता ने कहा कि 'अब केवल औपचारिकता ही रह गई है। डीके शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा और इसकी घोषणा कभी भी हो सकती है। आखिर अनिश्चितता का यह दौर कब तक चलेगा। डीके शिवकुमार पार्टी के लिए फंड भी जुटा सकते हैं और उसकी नीतियों को सुनियोजित और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।Ó
पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि बीदर स्कूल राजद्रोह मामले में पार्टी काफी देर कर गई। विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब आरोपियों को जमानत मिल गई। अगर डीके शिवकुमार नेतृत्व संभालते हैं तो सत्तारूढ़ भाजपा की चूक पर आक्रामक तरीके से आंदोलन खड़ा कर उनकी कमियों को उजागर करेंगे। हालांकि, पार्टी अध्यक्ष के रूप में शिवकुमार के चुनाव को लेकर विवाद भी है। वह आयकर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का सामना कर रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जाने के बाद वह फिलहाल जमानत पर बाहर है। लेकिन, वह सात बार के विधाययक हैं और वे पूर्व मुख्यमंत्रियों, एस बंगारप्पा, एस एम कृष्णा, सिद्धारामय्या और कुमारस्वामी के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुके हैं।
अपने 2018 के चुनावी हलफनामे में, शिवकुमार ने 8 40 करोड़ रुपए की संपत्तिी की घोषणा की थी। उनकी गितनी राज्य के सबसे अमीर नेताओं में होती है। उनके भआई डीके सुरेश पिछले दो बार से बेंगलूरु ग्रामीण से चुनाव जीतकर संसद में जा रहे हैं। हाल ही में ,अपने निर्वाचन क्षेत्र कनकपुरा में दुनिया की सबसे बड़ी क्राइस्ट प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा कर डीके फिर एक बार विवादों में घिरे और विरोधियों के निशाने पर आए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहा है कि अगर शिवकुमार प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो पार्टी के कामकाज में एक गतिशीलता आएगी। वे खुद मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं और महत्वाकांक्षी भी है। यदि डीके के प्रदेश अध्यक्ष और पाटिल के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति की पुष्टि होती है और सिद्धरामय्या विधायक दल के नेता रहते हैं तो यह आलाकमान का एक सधा हुआ निर्णय माना जाएगा। इससे राज्य के तीन समुदायों लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरुबा के बीच एक संतुलन भी बनेगा। ये तीनों समुदाय राज्य में बहुसंख्यक हैं। दूसरी तरफ, जहां भाजपा वोक्कालिगा वोकबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर ही है वहीं, शिवकुमार को प्रदेश अध्यभ बनाना कांग्रेस की एक स्मार्ट चाल हो सकती है।

Rajeev Mishra Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned