पर्यावरण रक्षार्थ लोगों में चेतना जरूरी

पर्यावरण रक्षार्थ लोगों में चेतना जरूरी

Shankar Sharma | Publish: Sep, 08 2018 10:02:59 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में आध्यात्मिक चातुर्मास में उपाध्याय रविंद्र मुनि ने ‘पर्यावरण एवं जैनागम’ विषय पर कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों में सुधार एवं चेतना जरूरी है।

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में आध्यात्मिक चातुर्मास में उपाध्याय रविंद्र मुनि ने ‘पर्यावरण एवं जैनागम’ विषय पर कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए लोगों में सुधार एवं चेतना जरूरी है। पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ चारों ओर शुद्ध एवं निर्मल वातावरण हो। जल के स्रोत शुद्ध हों।

मुनि ने ध्वनि प्रदूषण को भी अनेक बीमारियों का एक कारण बताते हुए कहा कि इससे कई प्रकार के वाद विवाद भी होते देखे गए हैं। बढ़ती आबादी और कई प्रकार के प्रदूषण चिंतनीय विषय है। इस दिशा में किसी प्रकार की सकारात्मक पहल ना होने से बुरे परिणाम भविष्य में झेलने पड़ेंगे। अनेक संतों ने जैन आगमों में पर्यावरण की रक्षा के लक्षणों को जोड़ा है। मर्यादाएं पर्यावरण की शुद्धि में शामिल हैं। व्यक्ति, व्यक्ति के सुधार से ही पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।

कर्मदान में भी पर्यावरण की मर्यादाएं शामिल बताई गई हैं। पेड़ हमारा जीवन है, उन्हें काटना नहीं बचाना है। व्यक्ति या पृथ्वी का बुखार हो अथवा किसी भी चीज का, समय पर नियंत्रण जरूरी है। जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव भारत सहित दुनिया के सभी विकासशील देशों पर पड़ रहा है। इससे पहले रमणीक मुनि ने श्रद्धालुओं की तप, त्याग रूपी भक्ति भावना की अनुमोदना कराया। उन्होंने कहा कि प्राकृत भाषा में प्रस्तुत पाठ के भावों को सुनने और समझने का प्रयास श्रावक-श्राविकाओं को करना चाहिए। रचित मुनि ने स्तवन प्रस्तुत किया। महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि जाप के लाभार्थी गौतमचंद सुमित्राबाई मुणोत का जैन पंचरंगी दुपट्टा ओढाकर सम्मान किया। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की।

जैन धर्म विश्व का प्राचीनतम धर्म
बेंगलूरु. मेवाड़ भवन, यशवंतपुर में मुनि रणजीत कुमार, मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में पर्युषण पर्व शुरू हुआ। पहले दिन खाद्य संयम दिवस मनाया गया। मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि करने का पर्व है। जैन धर्म विश्व का प्राचीनतम धर्म है। समय प्रवाह की दृष्टि से भी जैन धर्म का अपना वर्चस्व रहा है।

मुनि रमेश कुमार ने कहा कि अध्यात्मिक उन्नत भावनाओं का पर्व पर्युषण है। जिन-जिन गुणों से हमारी आत्मा का विकास होता है उनकी भावना वृद्धि, साधना, आराधना का प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा का प्रेरक पर्व पर्युषण है। स्वस्थ जीवन का सूत्र है कम खाना, गम खाना और नम जाना।

महिला मंडल यशवंतपुर की बहनों ने ’महके आत्मा का उपवन महावीर वाणी अपनाएं आया पर्व पर्युषण’ गीत से मंगलाचरण किया। सभा अध्यक्ष प्रकाशचंद बाबेल ने स्वागत किया। मंत्री गौतम मुथा, महिला मंडल अध्यक्ष अरुणा महनोत ने प्रासंगिक भावों की अभिव्यक्ति दी।

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