न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के खिलाफ न्यायालय जाने पर विचार: खरगे

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि स्थानीय निकाय का चुनाव लडऩे के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य बनाने

By: शंकर शर्मा

Published: 24 Dec 2015, 11:53 PM IST

बेंगलूरु. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि स्थानीय निकाय का चुनाव लडऩे के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य बनाने के खिलाफ न्यायालय में जाने को लेकर पार्टी मंच पर चर्चा की जाएगी। गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए सवाल के जवाब में खरगे ने कहा कि स्वीकार किया गया यह नियम अजा/जजा, पिछड़ा वर्ग व महिलाओं को सत्ता से वंचित करने के अलावा कुछ नहीं है, क्योंकि इन्हीं वर्गों के लोग साक्षरता में पिछड़े हैं। इन नियमों को हरियाणा व राजस्थान में लागू किया गया है। अप्रत्यक्ष रूप से यही लगता है कि भाजपा कमजोर वर्ग के लोगों को सत्ता से वंचित करने की अपनी विचारधारा को लागू करने जा रही है।

महिलाओं में साक्षरता की दर 50 प्रतिशत है। यदि शत प्रतिशत साक्षरता प्राप्त कर लेते हैं तो इस नियम को लागू करना अच्छा होगा, लेकिन आज की सूरत में इस तरह के नियमों को लागू करना आम आदमी को सत्ता से वंचित रखना है। महिलाओं व गरीबों को सत्ता में भागीदार बनाने के लिए पूर्व में रोस्टर प्रणाली लागू थी, लेकिन अब उसे हटा लिया गया है।

राज्य में हाल में पंचायत राज अधिनियम में संशोधन के जरिए न केवल सभी को सत्ता देना सुनिश्चित किया गया है बल्कि ग्राम, तालुक व जिला पंचायतों सहित सभी स्थानीय निकायों के हितों की रक्षा की गई है। विधान परिषद चुनाव को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए खरगे ने कहा कि कांग्रेस को इन चुनावों में अधिकतम सीटें जीतनी होंगी, क्योंकि विधान परिषद में भाजपा का बहुमत होने से विधानसभा से पारित  महत्वपूर्ण विधेयकों को ऊपरी सदन से लौटा दिया गया है।
शंकर शर्मा
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