राज्य में संवैधानिक मशीनरी ठप : सिद्धरामय्या

उन्होंने कहा कि यह मसला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन रहने के दौरान ही मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने गत 27 अक्टूबर को हुब्बली में खुलासा किया कि 17 विधायकों के त्याग करने व त्यागपत्र देने की वजह से ही राज्य में भाजपा की सरकार सत्ता में आई है। उन्होंने यह भी कहा कि ये इस्तीफे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश व उनकी निगरानी में दिए गए थे।

राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भेंट का समय मांगा
बेंगलूरु. विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या ने राज्य में संवैधानिक मशीनरी ठप हो जाने का आरोप लगाया है और इस संबंध में बातचीत करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ भेंट का समय देने का अनुरोध किया है।


राष्ट्रपति को लिखे पत्र की रविवार को मीडिया को जारी प्रति में कहा कि 2018 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश मिलने के बाद कांग्रेस ने जनता दल-एस के साथ मिलकर गठबंधन सरकार गठित की जो सुचारु रूप से काम कर रही थी। अचानक भाजपा के नेतृत्व के बहकाने पर दोनों दलों के 17 विधायकों ने स्पीकर को अपने इस्तीफे सौंप दिए। ये तमाम विधायक ढाई माह तक मुंबई के एक पांच सितारा होटल में ठहरे और इस दौरान वे ना तो अपने परिजनों से मिले ना ही उन्होंने महत्वपूर्ण बजट सत्र में ही भाग लिया। गठबंधन के घटक दलों के नेताओं की शिकायत पर स्पीकर ने इन 17 विधायकों को दल-बदल कानून की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया। इन विधायकों ने स्पीकर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।


उन्होंने कहा कि यह मसला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन रहने के दौरान ही मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने गत 27 अक्टूबर को हुब्बली में खुलासा किया कि 17 विधायकों के त्याग करने व त्यागपत्र देने की वजह से ही राज्य में भाजपा की सरकार सत्ता में आई है। उन्होंने यह भी कहा कि ये इस्तीफे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश व उनकी निगरानी में दिए गए थे।


यह भी कहा गया कि इन 17 विधायकों को मुंबई के एक होटल व लोनावला के रिसॉर्ट में बंधक की तरह रखा गया और उनको ना तो उनके परिजनों से मिलने दिया गया और ना ही राज्य विधानसभा के बजट सत्र में ही भाग लेने दिया गया।
उन्होंने पत्र में आरोप लगाया कि येडियूरप्पा के बयान से साबित हो जाता है कि भाजपा ने इन विधायकों को तोडऩे के लिए केंद्रीय जांच ऐजेंसियों का भय दिखाया। मौजूदा भाजपा सरकार का गठन भारत के संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ हुआ है और भाजपा ने सत्ता की खातिर तमाम नीति नियमों व प्रजातंात्रिक सिद्धांतों को ताक में रख दिया। इस तरह राज्य में संवैधानिक मशीनरी पूर्णत: ठप पड़ गई है। ये तमाम कार्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के इशारे पर हुए हैं।


उन्होंने कहा कि राज्य में संवैधानिक मशीनरी के ठप पड़ जाने के बारे में वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव, विधान परिषद में विपक्ष के नेता एसआर पाटिल, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, सांसद, विधायक व एआईसीसी के नेताओं के साथ उनसे (राष्ट्रपति से) मिलना चाहते हैं।

Surendra Rajpurohit
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