scriptcorona antibodies were found in 15.6 of population in sero survey-2 | दूसरे सीरो सर्वे में 15.6 प्रतिशत आबादी में ही मिले कोरोना वायरस के एंटीबॉडी | Patrika News

दूसरे सीरो सर्वे में 15.6 प्रतिशत आबादी में ही मिले कोरोना वायरस के एंटीबॉडी

  • दो सर्वे के बीच अधिक देरी के कारण घटे एंटीबॉडी
  • सेरोप्रेवलेंस महिलाओं में 12 फीसदी की तुलना में पुरुषों में 15.4 फीसदी से अधिक रही।
  • शहरी निवासियों में 14 फीसदी की तुलना में ग्रामीण आबादी में 15.4 फीसदी से अधिक रही।

बैंगलोर

Updated: August 14, 2021 07:36:22 pm

बेंगलूरु. जनवरी-फरवरी में किए गए दूसरे सीरोसर्वे के नतीजों ने कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नतीजों के अनुसार आरटी-पीसीआर जांच में पॉजिटिव प्रत्येक मरीज पर 12 लोगों में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी मिल हैं। यानी, एक मरीज ने औसतन 12 लोगों को संक्रमित किया है। इसे केस टू इंफेक्शन रेशियो (सीआइआर) कहते हैं। राज्य के लोग इस वर्ष जनवरी तक प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्राप्त करने से बहुत दूर थे। ऐसे में विशेषज्ञों ने कोरोना टीकाकरण दर बढ़ाने सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को सख्ती से लागू करना की सिफारिश की है।

दूसरे सीरो सर्वे में 15.6 प्रतिशत आबादी में ही मिले कोरोना वायरस के एंटीबॉडी
दूसरे सीरो सर्वे में 15.6 प्रतिशत आबादी में ही मिले कोरोना वायरस के एंटीबॉडी

कोविड-19 तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) के सदस्य डॉ. गिरिधर आर. बाबू ने अपने एक ट्वलीट में सीरोसर्वे के नतीजों की जानकारी देते हुए बताया कि अध्ययन में 15.6 प्रतिशत आबादी में एंटीबॉडी और केवल 0.5 प्रतिशत में सक्रिय संक्रमण मिला। राज्यव्यापी संक्रमण मृत्यु दर (आइएफआर) का अनुमान 0.11 प्रतिशत था और कोविड का बोझ 26.1 से 37.7 प्रतिशत के बीच था।

अल्फा और डेल्टा वेरिएंट्स ने ज्यादा फैलाया संक्रमण

डॉ. गिरिधर ने कहा, 'अध्ययन में आइजीजी सेरोप्रेवलेंस (एंटीबॉडी) के निम्न स्तर पाए गए, जो ज्यादातर एंटीबॉडी के घटने के कारण होते हैं। हमने इस वर्ष फरवरी के मध्य में सक्रिय मामलों का लगभग शून्य प्रसार पाया। सर्वेक्षण के दौरान राज्य जनसंख्या के हिसाब प्रतिरक्षा का वांछित स्तर प्राप्त करने से बहुत दूर था। कोरोना वायरस के अल्फा और डेल्टा वेरिएंट्स के कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए हैं। नोडल अधिकारी (जेनेटिक सीक्वेंसिंग) व न्यूरोवायरोलॉजिस्ट डॉ. वी. रवि ने बताया कि यह सर्वे तब किया गया था जब कोरोना की पहली लहर कम हो गई थी। दूसरे सर्वे में शामिल होने वाले लोग पहले सर्वे (सितंबर 2021) में शामिल नहीं हुए थे। इसलिए ये संक्रमण पहले सर्वेक्षण के अतिरिक्त हैं।

ऐसे पता चलेगी वास्तविक स्थिति

पहले सीरोसर्वे में 27.3 फीसदी आबादी में एंटीबॉडी मिले थे जबकि दूसरे सर्वे में 15.6 प्रतिशत आबादी में एंटीबॉडी मिले। इन दोनों आंकड़ों को जोडऩे से वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। जो 42.9 फीसदी है। इसका मतलब यह हुआ कि इस वर्ष जनवरी तक 42.9 फीसदी लोगों में ही कोरोना वायरस के एंटीबॉडी मौजूद थे। आधी से अधिक आबादी पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा था। दूसरी लहर के व्यापक होने का यह एक बड़ा कारण हो सकता है।

तीसरे सर्वे के लिए मंजूरी का इंतजार

प्रतिदिन कम-से-कम 1.2 लाख टीकाकरण करने और ज्यादा से ज्यादा कोविड जांच करने की जरूरत है। तीसरे सर्वे के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार है। इसमें टीकाकरण करा चुके लोगों को भी शामिल किया जाएगा। मौजूदा स्थिति और संक्रमण की व्यापकता का सही पता लग सकेगा। पहले और दूसरे सर्वे के बीच का अंतर तीन महीने से अधिक था। इसलिए एंटीबॉडी कम हो गए। इसे प्रमाणित करने के लिए पहले सर्वे में शामिल लोगों की फिर से जांच की गई। आधे से अधिक लोगों में एंटीबॉडी नहीं थे।

टेस्टिंग रणनीति और मृत्यु रिपोर्टिंग के पुनर्मूल्यांकन पर करें विचार

सर्वे में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक सीआइआर और कम मृत्यु दर वाले जिलों को अपनी टेस्टिंग रणनीति और मृत्यु रिपोर्टिंग के पुनर्मूल्यांकन पर विचार करना चाहिए। धारवाड़ जिले में आइएफआर सर्वाधिक है। पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी उपचार के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। आइएफआर बढऩे का यह एक बड़ा कारण हो सकता है। वायरस म्यूटेंट, जनसंख्या घनत्व अनुपात, कोविड नियमों में ढिलाई, कोविड से जुड़ी पाबंदियों की अनदेखी और बड़े परिवारों को भी बड़े कारण के रूप में देखा जा रहा है। तीसरे सर्वे में इस परिकल्पना पर ज्यादा प्रकाश डाल सकेंगे।

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