दुर्गा पूजा पर भी कोरोना का साया

शहर में कम होगी मूर्ति स्थापना, नहीं सजेंगे बड़े पंडाल

By: Santosh kumar Pandey

Published: 16 Oct 2020, 02:56 PM IST

बेंगलूरु. गौरी-गणेश त्यौहार के बाद अब कोरोना महामारी की छाया से दुर्गा पूजा भी अछूता नहीं है। दुर्गा पूजा में कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन दुर्गा पूजा को लेकर शहर में खास उत्साह नहीं है।

यहां तक कि मैसूरु में मनाया जानेवाला ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव भी बेहद सादगी से मनाए जाने की तैयारियां हैं। ऐसे में शहर में मूर्ति बनाने वाले कारीगरों के चेहरे पर उदासी साफ देखी जा सकती है। पिछले साल तक कई महीनों पहले से मूर्ति बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार उत्साह कम है।

पिछले कई वर्षों से सामूहिक रूप से दुर्गा पूजा मना रही संस्था सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद के उपाध्यक्ष श्रीकांत शर्मा बताते हैं कि इस बार कई जगहों पर मूर्ति की स्थापना नहीं होगी लेकिन परिषद की ओर से सादगी के साथ, सामाजिक दूरी व अन्य दिशा निर्देशों का पालन करते हुए आयोजन होगा। कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होगा।
परिषद के तत्वावधान में इस वर्ष स्थापित प्रतिमा की ऊंचाई कम होगी। इसके पहले साढ़े छह फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना होती थी लेकिन इस बार कोरोना के चलते चार फीट तक ऊंची प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।

50 मूर्तियां बिकना भी मुश्किल

17 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस उत्सव को लेकर मूर्ति बनानेवाले मुकुल पाल भी बेहद उदास हैं। मनोरनपाल्या में दुर्गा प्रतिमा की तैयारियों में व्यवस्त पाल कहते हैं ऐसी उदासी नहीं देखी। 1991 में पश्चिम बंगाल के बर्दवान से आए पाल को बिहार भवन से ऐसा सहयोग मिला कि वहीं मूर्ति बनाने लगे। उनका कहना है कि इस बार पूजा कम हो रही है।

पिछली बार 300 तक मूर्तियां बिक गई थी इस बार ५० का आंकड़ा छूना भी मुश्किल लग रहा है। पाल कहते हैं, ऐसे हालात में गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है। यही हमारी रोजी-रोटी है। क्या करें। गणेश पूजा पर भी कोरोना की मार थी और अब दुर्गा पूजा भी फीका जा रहा है। पिछले साल दस फीट, आठ फीट तक बड़ी प्रतिमा बनाई थी, इस बार चार फीट से बड़ी प्रतिमा नहीं है। हर साल कोलकाता से कारीगर आते थे, इस बार कोई नहीं आया, जरूरत ही नहीं पड़ी।

Santosh kumar Pandey Desk
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