कोविड-19 से मिला ऑनलाइन कारोबार को बढ़ावा

2024 तक कारोबार में तीन गुणा बढ़ोतरी की उम्मीद
30 अरब डॉलर से 85 अरब डॉलर तक कारोबार पहुंचने की संभावना

By: Rajeev Mishra

Published: 30 Jun 2020, 09:10 PM IST

बेंगलूरु.
कोरोना महामारी का देश के ऑनलाइन कारोबार पर सकारात्मक असर पड़ा है। एक तरफ मॉल और बाजारों में अभी कारोबार सामान्य नहीं हो पा रहा है वहीं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लेन-देन कोविड-19 से पूर्व जैसी होने लगी है। हालांकि, हाइ-वैल्यू लेन-देन अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि यह अगले साल तक सामान्य हो पाएगा।

ऑनलाइन कारोबार और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना के कारण ग्राहकों की क्रय शक्ति में गिरावट आई है इसलिए वे छोटी-मोटी खरीदारी पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसके बावजूद भारत में ई-कॉमर्स बाजार के लगभग तीन गुणा बढ़ाने में कोरोना महामारी मददगार साबित हो सकती है। एक रिसर्च कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लोग ऑनलाइन कंपनियों से वैसे सामान खरीद रहे हैं जिसकी खरीदारी वे अमूमन स्थानीय बाजारों से करते थे। क्योंकि वे बाजारों में जाना नहीं चाहते। लोग बाहर तभी निकल रहे हैं जब यह बेहद जरूरी हो। इंडस्ट्री से जुड़े एक कारोबारी ने कहा कि 'जो लोग इन स्थितियों में फंसे हैं उनका हम पूरा ख्याल रखने की कोशिश कर रहे हैं। घर पर उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हम अपनी भूमिका निभा रहे हैं। हम उनका भी ख्याल रख रहे हैं जो स्थानीय स्तर पर कारोबार करते हैं।Ó दरअसल, ऑनलाइन कंपनियां ग्राहकों को जोड़े रखने के लिए मांग के अनुरूप आपूर्ति पर पूरा जोर लगा रही हैं। कई बड़ी कंपनियों के 4 अरब डॉलर तक के निवेश की योजना भी है।

तीन गुणा कारोबार बढऩे की उम्मीद
विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2018 में भारतीय ऑनलाइन कारोबार लगभग 30 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2024 तक 85 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वहीं, वर्ष 2028 तक इसके 200 अरब डॉलर कारोबार का आंकड़ा छूने की उम्मीद है। कोरोना से उपजी चुनौतियों के बाद ग्राहक सर्वाइवल मोड से एडजस्टमेंट मोड की ओर आ रहे हैं। लेकिन, अभी भी बड़े खर्चों से बच रहे हैं। एक ई-कॉमर्स कंपनी के अधिकारी ने कहा कि छवि बनाने में ब्रांड की भूमिका तभी होती है जब आप घर से बाहर निकलें। कंपड़े अगर घर पर पहनने हैं तो फिर ब्रांड कोई मायने नहीं रखता। इस बात को ग्राहक भली-भांति समझते हैं।

नए प्रयोग भी
कोरोना महामारी के बीच ऑनलाइन रिटेलर्स कई तरह के प्रयोग भी कर रहे हैं। हाल ही में एक ऑनलाइन कंपनी ने अपने प्लेटफार्म को तीन नई भाषाओं तमिल, तेलुगू और कन्नड़ से जोड़ दिया। यह लोगों तक पहुंचने और कारोबार को सहज बनाने की कोशिशों का एक हिस्सा है। कंपनी के अधिकारी ने कहा कि 'भाषा कारोबार बढ़ाने का एक माध्यम होना चाहिए बाधा नहीं। अगर भाषा की समस्या उचित ढंग से हल हो जाए तो हम लाखों ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं जो सेवा से वंचित हैं।Ó एक अन्य कंपनी के पदाधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी को पसंद करना उपभोक्ताओं के व्यवहार में आया एक आश्चर्यजनक बदलाव है। लेकिन, यह ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए सुखद और राहत भरा है।

Rajeev Mishra Reporting
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