कोविड जनित अवसाद व तनाव से उबरे 2400 लोग

- मानसिक स्वास्थ्य को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल सकी

By: Nikhil Kumar

Published: 10 Sep 2021, 07:42 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना महामारी खुद के साथ मानसिक व सामाजिक परेशानियां भी लेकर आई। नौकरी छूटना, अपनों की असमय मौत, वर्क फ्रॉम होम की चुनौतियां, आर्थिक संकट, कोरोना संक्रमण से जुड़े सामाजिक कलंक, सोशल डिस्टेंसिंग कुछ ऐसी चुनौतियां हैं जिनका लोगों को सामना करना पड़। सभी के शारीरिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में कड़ी मेहनत की। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल सकी। व्यक्तिगत स्तर पर कई विशेषज्ञों ने इस संबंध में समाज की मदद करने की कोशिश की।

बेंगलूरु की काउंसलर डॉ. रूपा राव ने 2,400 लोगों को मुफ्त परामर्श और प्रशिक्षण देकर इस तरह की चुनौतियों का सामना करने में मदद की। उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोग अनिद्रा, चिंता, अवसाद, घबराहट, वर्क फ्रॉम होम के कारण पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे थे। 50 फीसदी से अधिक लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित या अन्य प्रकार के मुद्दों का सामना किया। महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना सभी के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

डॉ. राव का कहना है कि चुनौती यह थी कि समस्याएं एक दूसरे से अलग थीं। हर किसी की समस्या उनके लिए अद्वितीय थी। इसलिए, उन्हें सलाह देने के लिए विभिन्न तरीकों का सहारा लेना पड़ा।

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Nikhil Kumar Reporting
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