कोरोना : टेस्टिंग बढ़ने से दबाव में लैब

- प्रतिदिन हजारों नमूनों की समय पर नहीं हो पाती है जांच

By: Nikhil Kumar

Published: 03 Apr 2021, 04:06 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक में बीते कुछ दिनों से रोज एक लाख से ज्यादा नमूने जांचे जा रहे हैं। लैबों पर समय रहते नतीजे जारी करने का भारी दबाव है। नमूने बढऩे के साथ ही काम का बोझ बढ़ा है। इस कारण जांच के लिए लंबित नमूनों की संख्या भी बढ़ गई है।

आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च तक सात जिलों की प्रयोगशालाओं में करीब 12,000 नमूने जांच के लिए लंबित थे। सभी जिले अपनी रिपोर्ट में लंबित नमूनों की संख्या का उल्लेख नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन हर दिन करीब 20 हजार नमूनों की जांच नहीं हो पा रही है। विशेषकर निगेटिव रिपोर्ट जारी करने में देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सबसे पहले पॉजिटिव रिपोर्ट जारी करने का नियम है। इससे मरीजों को समय रहते आइसोलेट कर उपचार शुरू किया जा सकता है।

बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) में प्रधान स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. के. विजेंद्र ने बताया कि प्रयोगशालाओं को स्पष्ट निर्देश हैं कि नमूने पहुंचने के 36 घंटे में रिपोर्ट आ जानी चाहिए। बीबीएमपी जोन में नमूने लंबित नहीं हैं। समय रहते संबंधितों को रिपोर्ट मिल रही है। कई जिले ऐसे भी हैं जहां कोई नमूना लंबित नहीं है।

नोडल अधिकारी (टेस्टिंग) डॉ. सी. एन. मंजुनाथ ने बताया कि नमूनों की संख्या के साथ जांच में देरी स्वाभाविक है। समस्या से निपटने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, उन्हें सही संख्या की जानकारी नहीं है। प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा नमूने जांचे के लिए विभिन्न लैब पहुंचते हैं। ऐसे में 20 हजार नमूने लंबित रह जा रहे हैं तो विशेष चिंता की बात नहीं है। लंबित नमूनों की जांच भी जल्द से जल्द होती है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अन्य अधिकारी के अनुसार कोविड-19 तकनीकी सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रत्येक जिले के लिए दैनिक परीक्षण लक्ष्य बढ़ाए गए हैं। लैबों के कर्मचारियों के कई पालियों में काम करने के बावजूद जांच के लिए नमूने लंबित रह जा रहे हैं। इस बीच पूल टेस्टिंग यानी एक से ज्यादा सैंपल को एक साथ लेकर जांचने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे राहत है।

Nikhil Kumar Reporting
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