कोविड-19 संक्रमण से उबरा मरीज दे सकता है दो लोगों को जिंदगी

- कर्नाटक में पांच गुना बढ़ी प्लाज्मा की मांग
- प्लाज्मा थेरेपी

By: Nikhil Kumar

Updated: 16 Apr 2021, 10:31 AM IST

बेंगलूरु. कोविड के बढ़ते मामलों के बीच कर्नाटक में प्लाज्मा (demand for plasma increases five fold in Karnataka) की मांग बढ़ गई है। राज्य के अस्पतालों के आइसीयू में कोविड के 470 मरीज उपचाराधीन है। प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) उम्मीद की किरण है। चिकित्सकों के अनुसार जनवरी से प्लाज्मा की मांग पांच गुना बढ़ी है। लेकिन दाताओं की कमी उपचार के आड़े आ रही है। प्लाज्मा बैंकों के अनुसार प्रतिदिन करीब 50 लोग प्लाज्मा के लिए फोन कर रहे हैं।

अधिकृत प्लाज्मा बैंक संचालकों का कहना कि कोविड के गंभीर मरीजों के लिए कई चिकित्सक प्लाज्मा थेरेपी की सलाह दे रहे हैं। परिजन प्लाज्मा के लिए भटक रहे हैं। कोविड से उबरे मरीज अपेक्षा अनुसार प्लाज्मा दान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

लोगों को प्रेरित करने की जरूरत

एचसीजी प्लाज्मा बैंक के प्रमुख डॉ. यू. एस. विशाल राव ने बताया कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित कई पत्रों ने दूसरी लहर से निपटने के लिए प्लाज्मा थेरेपी को महत्वपूर्ण हथियार बताया है। प्लाज्मा दान के लिए लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री बी. एस. येडियूरप्पा से भी बात की है। बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका के आयुक्त गौरव गुप्ता को भी लिखा है।

जागरूकता का अभाव

डॉ. राव के अनुसार कोविड वॉर रूम के सहयोग से पात्र दाताओं तक पहुंचा जा सकता है। प्लाज्मा दान के लिए राजी किया जा सकता है। जागरूकता के अभाव में भी कई लोग प्लाज्मा दान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

ऑक्सीजन पर रखने के तीन दिनों के भीतर थेरेपी कारगर

डॉ. राव ने बताया कि गत वर्ष 60 फीसदी मरीज प्लाज्मा थेरेपी से लाभान्वित हुए। कोविड से उबरा हर मरीज दो लोगों की जान बचा सकता है। मरीज को ऑक्सीजन पर रखने के तीन दिनों के भीतर प्लाज्मा थेरेपी हो तो कई मरीजों को बचाया जा सकता है।

तीन सप्ताह से बढ़ी मांग

प्लाज्मा, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस और मृतकों के दाह संस्कार के लिए कार्यरत गैर सरकारी संस्थान मर्सी मिशन के स्वयं सेवकों ने बताया कि गत तीन सप्ताह में प्लाज्मा की मांग बढ़ी है। स्वयं सेवक तौसीफ मसूद ने बताया कि हर दिन करीब छह लोग प्लाज्मा के लिए संपर्क करते हैं। मांग के अनुसार प्लाज्मा उपलब्ध नहीं है।

जीव रक्क्षा ब्लड बैंक के प्रबंध न्यासी अब्दुज रहमान शरीफ ने बताया कि गत एक माह में 10 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है। हर दिन प्लाज्मा के लिए करीब 50 लोग संपर्क कर रहे हैं।

नहीं मिली प्रोत्साहन राशि

गत वर्ष राज्य सरकार ने प्लाज्मा दान करने वालों को पांच हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। इसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच दाताओं की संख्या बढ़ी। लेकिन किसी को भी प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। हालांकि, इस योजना की नैतिकता पर भी सवाल उठे थे। इससे योजना खटाई में पर गई।

रक्तदान की तरह ही हो शिविरों का आयोजन

असल में सरकार ने प्लाज्मा दान को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया है। रक्तदान शिविरों की तरह प्लाज्मा दान शिविरों का आयोजन भी प्रशासनिक व सरकारी स्तर पर होना चाहिए। लोगों को समझाना होगा कि प्लाज्मा दान रक्तदान की तरह है। कुछ अनिष्ट की आशंका ही लोगों को अच्छा करने से डराती है। इस डर को पहले खत्म करना होगा।

Nikhil Kumar Reporting
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