कोविड से उबरे मरीज अब साइटोमेगालोवायरस से परेशान

- शहर में सामने आए दो मामले, एक मरीज की मौत

By: Nikhil Kumar

Updated: 12 Jul 2021, 05:02 PM IST

बेंगलूरु. ब्लैक फंगस (Black Fungus) सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को सामना कर रहे कोविड से उबरे मरीजों व चिकित्सकों के लिए अब एक और स्वास्थ्य समस्या चुनौती बनकर उभरी है। चिकित्सकीय भाषा में इसे साइटोमेगालोवायरस (Cytomegalovirus) या सीएमवी बीमारी के नाम से जाना जाता है। इसे आम भाषा में हर्पिस वायरस संक्रमण भी कहते हैं। चिकित्सकों के अनुसार ये मामले उन मरीजों में ज्यादा देखे गए हैं जो कोविड से उबर चुके हैं और उपचार के दौरान जिन्हें स्टेरॉयड दी गई थी।

शहर के मणिपाल अस्पताल (Manipal Hospital) में एक ऐसे ही 50 वर्षीय मरीज का उपचार जारी है जबकि शहर के अपोलो अस्पताल में 63 वर्षीय के मरीज की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों के अनुसार कोविड से उबरने के चार सप्ताह बाद मरीज सीएमवी बीमारी से ग्रसित हुआ और उसे उच्च स्तरीय महंगे आणविक परीक्षण से गुजरना पड़ा। सीएमवी जैसे वायरस का पता लगाने के लिए निचले श्वसन पथ के नमूनों की आवश्यकता होती है। मरीज को मधुमेह, उच्च रक्तचाप था। स्टेरॉयड के कारण उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई थी। सीएमवी के लिए जोखिम कारक वही हैं जो फंगल संक्रमण के लिए हैं।

अपोलो अस्पताल में पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख व बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका विशेषज्ञ समिति के सदस्य डॉ. रविंद्र मेहता ने बताया कि सीएमवी एक वायरस है जो आमतौर पर प्रतिरक्षात्मक मरीजों पर हमला करता है। यह पोस्ट-ट्रांसप्लांट व्यक्तियों या स्टेरॉयड (Steroid) और अन्य इम्यूनोसप्रेसिव दवा ले रहे मरीजों में भी देखा गया है। इसका पता लगाना कठिन है क्योंकि इसके लिए उच्च-स्तरीय परीक्षण की आवश्यकता होती है और इसके लिए सही नमूने की आवश्यकता होती है।

डॉ. मेहता के अनुसारे सीएमवी जैसे वायरल संक्रमण से बचने के लिए रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखना होगा। लंबे समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचने की जरूरत है।

मणिपाल अस्पताल में पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सत्यनारायण मैसूर ने बताया कि सीएमवी के वे जिस मरीज का उपचार कर रहे हैं वह कभी भी इम्यूनोसप्रेसिव दवा पर नहीं था और उसके किसी अंग का प्रत्यारोपण भी नहीं हुआ है। कोविड के गंभीर होने के कारण मरीज वेंटिलेटर पर उपचाराधीन था। बाद में उसे एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन (ईसीएमओ) डिवाइस पर रखा गया, ताकि वह सांस ले सके। स्थिति में सुधार नहीं होने के कारण ब्रोंकोस्कोपी की गई और जांच करने पर सीएमवी न्यूमोनाइटिस की पुष्टि हुई। अपोलो अस्पताल में जिस मरीज को बचाया नहीं जा सका, उसे भी ईसीएमओ डिवाइस पर रखा गया था।

- शुरुआत में बुखार और थकान साइटोमेगालोवायरस लक्षण हो सकते हैं। लेकिन, स्थिति गंभीर होने पर आंखों, दिमाग व अन्य अंदरूनी अंगों में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखने लगते हैं।
- साइटोमेगालोवायरस संक्रमण उन मरीजों में देखने को मिलता है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या फिर जो इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं पर हों। कमजोर इम्यूनिटी और स्टेरॉयड दवाओं की वजह से साइटोमेगालोवायरस की आशंका भी बढ़ जाती है।
- साइटोमेगालोवायरस के लक्षण लगातार बदलते रहते हैं। इसलिए, कोविड के मरीजों में साइटोमेगालोवायरस की जांच करनी ही चाहिए। खासतौर से उन मरीजों को जो गंभीर स्थिति में कोरोना संक्रमित रहे हों।

Nikhil Kumar Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned