मोक्ष कि अभिलाषा होना संवेग कहलाता है

धर्मचर्चा

By: Yogesh Sharma

Published: 01 Aug 2020, 04:34 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शुले जैन स्थानक में विराजित श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि ने समकित की यात्रा के अंतर्गत बत्तीस शुभ योग संग्रह का विवेचन करते हुए कहा मोक्ष कि अभिलाषा होना संवेग कहलाता है। बंधनों से आजाद होकर मुक्ति की ख्वाहिश जन्मना संवेग है। संसार कैद खाना है इस कैद खाने से बाहर निकलने की इच्छा होना संवेग है। जब मोक्ष की इच्छा जन्मती है, भीतर में ऐसा परिवर्तन होता है कि अनंता नुबंदी कषाय चौकड़ी का सय हो जाता है। इच्छा हमेशा पूरी होती है कभी अधूरी नहीं रहती। इच्छा कब पूरी होगी जब व्यक्ति उसके लिए अनुकूल प्रयत्न करता है। मोक्ष की इच्छा जन्मती है तो जीव एक दिन अवश्य मोक्ष जाता है। संवेग से मोक्ष के रास्ते के सबसे बड़ी बाधा खत्म हो जाती है। मुनि ने कहा बर्बादी का कारण बने, ऐसी इच्छा पालो मत। हम जो इच्छा करते हैं वह इस जन्म में ना सही परंतु किसी न किसी जन्म में पूरी होती है। संसार को बढ़ाने वाली इच्छा मत करो। समय आने पर अनुत्तर श्रद्धा प्राप्त हो जाती है। विषय सुखों को संवेग पाने के बाद जीव छोड़ देता है। संवेग से आध्यात्मिक लाभ होता है।
समाधी संथारा ग्रहण करते हैं तो जीव इच्छाओं से स्वयं को अलग कर लेता है। संसार की सारी इच्छाओं का त्याग करना ही संथारा है। मोक्ष की इच्छा आबाद करती है बाकी इच्छाएं बर्बाद करती हैं। जैसी इच्छा जन्मती है वैसा मार्ग मिलता है। कभी भी गलत इच्छा मत रखो बर्बाद हो जाओगे। मुनि ने कहा कि व्यक्ति इच्छाओं को बर्बादी का कारण मानते हुए भी उनका त्याग नहीं करता। परंतु उसकी ओर कदम बढ़ाता है। शराब पीने वाले सिगरेट आदि का सेवन करने वाले जानते हैं कि यह शरीर के लिए हानिकारक है परंतु फिर भी नहीं छोड़ते यह सब छूट सकता है जब इच्छा छूटती हंै। किया गया अच्छा और बुरा दोनों संकल्प पूरे होते हैं चाहे उसके लिए कितने ही जन्म लेने पड़े इसलिए कभी बुरा नहीं सदसंकल्प करो। जिसे मोक्ष की इच्छा जन्म जाती है उसे उसी भव या अधिकतम तीसरे भव में मुक्ति मिल जाती है। मोक्ष की इच्छा से मिथ्यात्व रूपी अंधेरा खत्म हो जाता है, सम्यकत्व व का उजाला हो जाता है ,अनुत्तर धर्म श्रद्धा उत्पन्न होती है। अनुत्तर धर्म श्रद्धा के बारे में मुनि ने बताया कैसी भी परेशानी हो परंतु व्यक्ति धर्म मार्ग से डिगता नहीं बल्कि श्रद्धा और मजबूत हो जाती है। हम अपनी धर्म श्रद्धा के माध्यम से दूसरों के जीवन को परिवर्तित कर सकते हैं। मुनिश्री ने धर्म को अपने जीवन में सबसे आगे रखने और छोटी-छोटी परेशानियों में धर्म श्रद्धा को डांवाडोल न करने की प्रेरणा प्रदान की। संचालन संघ के मंत्री मनोहरलाल बंब ने किया।

Yogesh Sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned