अब शुरू होगा डेयरी सर्कल-नागवारा भूमिगत मेट्रो का काम

नम्मा मेट्रो फेज-२ के अंतर्गत गोट्टीगेरे-नागवारा खंड में डेयरी सर्कल से नागवारा के बीच भूमिगत निर्माण के लिए निविदा आवंटन की प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो गया है। चार पैकेजों में निर्मित होने वाले इस भूमिगत खंड के दो पैकेजों की निविदा जारी कर दी गई है।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 03 Mar 2019, 04:56 PM IST

निविदा प्रक्रिया का पहला चरण पूरा, २६२८ करोड़ लागत
शेष दो खंडों के लिए बोली जमा करने की समय सीमा २१ मार्च
बेंगलूरु. नम्मा मेट्रो फेज-२ के अंतर्गत गोट्टीगेरे-नागवारा खंड में डेयरी सर्कल से नागवारा के बीच भूमिगत निर्माण के लिए निविदा आवंटन की प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो गया है। चार पैकेजों में निर्मित होने वाले इस भूमिगत खंड के दो पैकेजों की निविदा जारी कर दी गई है।

बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने अपनी वेबसाइट पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि चार में से दो पैकेजों के लिए एलएंडटी लिमिटेड ने निविदा हासिल की है। एलएंडटी द्वारा वेल्लारा जंक्शन से शिवाजी नगर पैकेज का निर्माण १,३२९.१४ करोड़ रुपए में जबकि शिवाजीनगर से टेनेरी रोड भूमिगत खंड का निर्माण १,२९९ करोड़ रुपए में किया जाएगा। दो और पैकेजों डेयरी सर्कल से लैंगफोर्ड टाउन और टेनरी रोड से नागवारा तक के लिए बोली जमा करने की अंतिम समय सीमा 21 मार्च है। अधिकारियों के अनुसार शेष दो पैकेजों को अंतिम रूप देने में लगभग पांच महीने का समय लग सकता है। बीएमआरसीएल ने इसके पूर्व डेयरी सर्कल से नागवारा के बीच १३.७ किलोमीटर भूमिगत निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की थी।

हालांकि निविदार्थियों ने बीएमआरसीएल की अनुमानित परियोजना लागत से करीब ७० फीसदी ज्यादा बोली लगाई थी, जिस कारण निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी। परियोजना की लागत को न्यायसंगत बनाने के लिए बीएमआरसीएल ने फिर से निविदा आमंत्रित की और नम्मा मेट्रो को इसमें सफलता भी मिली है। जिन दो पैकेज की निविदा को अंतिम रूप दिया गया, वह अनुमानित लागत से १७.५ फीसदी ज्यादा है।

निर्माण समय सीमा ४२ महीने
नम्मा मेट्रो ने दोनों भूमिगत खंडों के लिए ४२ महीने की निर्माण समय सीमा निर्धारित की है। निविदा कंपनी को कार्य सौंपे जाने के दिन से यह गणना शुरू होगी। हालांकि निर्माण अवधि के दौरान विविध प्रकार की चुनौतियों को देखेते हुए इसमें समय वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता है। सुरंग निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती कठोर चट्टानें हैं, जिन्हें काटना टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) के लिए दुरूह काम रहा है। इसके अतिरिक्त अन्य चुनौतियों से भी निपटना होगा।

Santosh kumar Pandey Desk
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