डेढ़ महीने तक मैसूरु महल में ही रहेंगे दशहरा हाथी

विश्व प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा महोत्सव की उलटी गिनती गुरुवार को दशहरा हाथियों के पहले दल के मैसूरु महल परिसर पहुंचने के साथ ही शुरु हो गई

By: शंकर शर्मा

Published: 18 Aug 2017, 10:04 PM IST

मैसूरु. विश्व प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा महोत्सव की उलटी गिनती गुरुवार को दशहरा हाथियों के पहले दल के मैसूरु महल परिसर पहुंचने के साथ ही शुरु हो गई। आठ हाथियों पहले दल का मैसूरु महल के जयमार्तंड द्वार पर परंपरागत अंदाज गर्मजोशी से स्वागत किया गया। महल के बाल्कनी से फूलों की पंखुडिय़ों की वर्षा, परंपरागत संगीत और पुलिस बैंड की धुनों के बीच काफी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी में हाथियों का स्वागत हुआ।


हाथियों की टोली ३० सितम्बर को दशहरा महोत्सव की समाप्ति तक महल परिसर में ही रहेगा। पिछले सप्ताह वनक्षेत्रों से रवाना हुआ हाथियों का चार दिनों से शहर के बाहरी इलाके में स्थित आलोक महल में ठहरा हुआ था। गुरुवार सुबह वहां से इन हाथियों को विशेष तौर पर तैयार ट्रकों में पहले वन विभाग के मुख्यालय अरण्य भवन लाया गया, जहां से सुबह करीब ९ बजे हाथियों का दल महल परिसर के लिए रवाना हुआ।


महल परिसर में पहले ही जिला प्रभारी मंत्री एच सी महादेवप्पा के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों का दल और काफी संख्या में पर्यटक हाथियों के आगमन का इंतजार कर रहे थे। हाथियों का दल सुबह करीब ११.१५ बजे महल के जयमार्तंड द्वार पर पहुंचा, जहां महादेवप्पा ने परंपरागत अंदाज में गजराजों का स्वागत किया।


हाथियों दल के महल परिसर में प्रवेश से पहले पुलिस ने गार्ड ऑफ आर्नर भी दिया। हाथियों के स्वागत में लोक कलाकरों की टोली ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की देकर पर्यटकों का मन मोह लिया। महल की मुख्य ड्योढ़ी पर पहुंचने पर जब हाथियों पर पुष्प वर्षा हुई तो उन्होंने सूंढ़ उठाकर अभिवादन किया, जैसे वे इससे अभिभूत हों।

आलोक से विदाई से पहले भी हाथियों की पूजा हुई और महल में प्रवेश करने पर भी हाथियों की पूजा हुई। शुभ मुहूर्त में हाथियों के दल ने १२.२० बजे जयमार्तंड द्वार से महल परिसर में प्रवेश किया। गणपति मंत्र के बीच पादपूजा और अन्य अनुष्ठान महल के मुख्य पुजारी एस वी प्रहलाद राव ने कराए। हाथियों के दल में मुख्य हाथी अर्जुन के अलावा अभिमन्यु, बलराम, भीमा,गजेंद्र, विजया, कावेरी और वरलक्ष्मी शामिल हैं।


दशहरा महोत्सव की समाप्ति तक हाथियों के महावत और सहायक परिवार सहित महल परिसर में ही रहेंगे। महावत और सहायकोंं के बच्चों के लिए महल परिसर में एक अस्थाई स्कूल भी बनाया गया है। शारदीय नवरात्रि के साथ ही १० दिनों तक मैसूरु दशहरा महोत्सव का आयोजन होता है।


राज्य सरकार और पूर्व शाही परिवार की ओर से समानांतर कार्यक्रम होते हैं। परंपराओं के मुताबिक मैसूरु की अधिष्ठात्री देवी चामुंडेश्वरी की चामुंडी पहाड़ी पर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही दशहरा महोत्सव की शुरुआत होती है। महोत्सव के अंतिम दिन विजयदशमी पर जंबो सवारी निकलती है, जो मैसूरु महल से बन्नीमंटप तक जाती है। वहां मशाल जुलूस के साथ महोत्सव का समापन होता है।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के साथ मुख्यमंत्री भी भाग लेते हैं। समापन समारोह में राज्यपाल मुख्य अतिथि होते हैं। जंबो सवारी में मुख्य हाथी ७५० किलो वजनी ऐतिहासिक स्वर्ण सिंहासन लेकर चलता है। महल परिसर में पूर्व शाही परिवार की ओर धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही सांकेतिक निजी दरबार का भी आयोजन होता है।

पहली बार पुलिस बैंड ने दी सलामी
दशहरा महोत्सव के इतिहास में यह पहला मौका था जब मैसूरु महल परिसर में हाथियों के दल स्वागत मेें पुलिस बैंड ने संगीत की धुनें बजाई और सलामी दी। सडक़ से गुजर रहे हाथियों के दल का लोगों ने स्वागत किया। कई जगहों पर ले हाथियों के साथ सेल्फी लेने की कोशिश करते दिखे तो ऊंचे भवनों से भी लोग गजराजों की टोली की झलक पाने की कोशिश करते दिखे। हाथियों का दल चामराजा डबल रोड, रामास्वामी चौराह, बल्लाल चौराहा, गन हाउस चौराहा होते हुए जयमर्तांड द्वार पहुंचा।

शंकर शर्मा
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