डेल्टा प्लस वेरिएंट : कर्नाटक के लिए एक अलग रणनीति की जरूरत

- 918 नमूनों की जेनेटिक सीक्वेंसिंग रिपोर्ट लंबित

By: Nikhil Kumar

Updated: 27 Jun 2021, 12:29 PM IST

बेंगलूरु. कोविड के नए मामलों में गिरावट आई है। लेकिन, कोरोना के डल्टा प्लस वेरिएंट का उभरना चिंता का कारण बन गया है। विशेषज्ञों और कोविड सीक्वेंसिंग टास्क फोर्स के सदस्यों ने जेनेटिक सीक्वेंसिंग (आनुवांशिक अनुक्रमण) बढ़ाने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले छह महीनों में नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेस (एनसीबीएस) के सहयोग से राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (निम्हांस) ने 2,300 जीनोम के नमूनों का अनुक्रम किया है। 918 नमूनों के रिपोर्ट लंबित है।

टास्क फोर्स के एक सदस्य ने बताया कि जीनोम अनुक्रमण के लिए नमूने उस क्षेत्र के आधार पर चुने जाते हैं जहां ज्यादा मामले दर्ज किए गए हों। अनुक्रमण के परिणाम तभी प्रभावी होंगे जब यह निरंतर आधार पर और बड़े पैमाने पर होगा। वर्तमान में यह सांख्यिकीय मॉडल पर आधारित है।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और मंत्रालय की समन्वय समिति के साथ परीक्षण के पैमाने को तेज करने पर चर्चा चल रही है। अपनी महानगरीय प्रकृति और अस्थायी आबादी के कारण भारत जो अनुसरण कर रहा है, उसकी तुलना में कर्नाटक के लिए एक अलग रणनीति बनाने की जरूरत है।

Nikhil Kumar Reporting
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