50 फीसदी घटी मेडिकल ऑक्सीजन की मांग

  • बेंगलूरु में खपत सबसे ज्यादा

By: Nikhil Kumar

Updated: 15 Nov 2020, 11:42 PM IST

बेंगलूरु. कोविड के गंभीर मरीजों के उपचार में सबसे अहम और प्रभावी मेडिकल ऑक्सीजन की मांग 50 फीसदी तक कम हुई है। सितंबर में प्रतिदिन 500 मेट्रिक टन के मुकाबले नवंबर में रोजाना 200-250 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की ही जरूतर पड़ रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के अस्पतालों में पांच नवंबर को 271 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत हुई। लेकिन अगले ही दिन मांग में 98 मेट्रिक टन की कमी दर्ज की गई। सात नवंबर को 242 मेट्रिक टन की जरूरत पड़ी।

बेंगलूरु के अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत ज्यादा है। प्रदेश में प्रतिदिन सामने आने वाले नए मरीजों में बेंगलूरु की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा रही है। प्रदेश में उपचाराधीन 28,026 मरीजों में से 17,769 मरीजों का उपचार बेंगलूरु शहरी जिले में हो रहा है। प्रदेश के अस्पतालों के आइसीयू में भर्ती 781 मरीजों में से 391 मरीज बेंगलूरु के अस्पतालों में हैं।

स्वास्थ्य आयुक्त पंकज कुमार पांडे ने बताया कि कोविड मरीजों की संख्या हर दिन घट रही है। पहले के मुकाबले गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज भी घटे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निकट भविष्य में मामले बढ़ते हैं तो ऑक्सीजन की मांग फिर बढ़ेगी। इसलिए ऑक्सीजन की आपूर्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है।

चिकित्सकों के अनुसार दूसरे लहर की आशंका है। मरीजों की संख्या में कमी अस्थाई राहत हो सकती है। कोरोना के दूसरे लहर के खतरों को देखते हुए हर समय तैयार रहने की जरूरत है। त्योहारी मौसम में बड़े पैमाने पर कोविड नियंत्रण नियमों की अनदेखी हो रही है। हालांकि, यह जरूर है कि पहली लहर के मुकाबले दूसरे लहर के दौरान संक्रमित लोगों का उपचार आसान होगा।

दरअसल तरल मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति कंपनियों द्वारा शुल्क बढ़ाने की बढ़ती शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए प्रदेश सरकार ने 29 अक्टूबर को ही परिवहन और हैंडलिंग शुल्क तय कर दिया है। मात्रा के आधार पर 35-60 रुपए के बीच उच्चतम शुल्क तय की गई।

प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड निर्संग होम्स एसोसिएशन (पीएचएएनए) ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ बढ़ी हुई दरों पर ऑक्सीजन लेने या फिर आपूर्ति बंद करने की धमकी देने की शिकायत की थी। प्रदेश सरकार से परिवहन दर तय करने की अपील की थी।

सरकार ने अब 10 टन तक ऑक्सीजन के लिए प्रति किमी अधिकतम 35 रुपए तय की है। 10-20 टन के लिए प्रति किमी अधिकतम 40, 15-20 टन के लिए प्रति किमी अधिकतम 45, 20-30 टन के लिए प्रति किमी अधिकतम 52.5 और 30 टन से ज्यादा के लिए प्रति किमी अधिकतम 60 रुपए का भुगतान करना होगा।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 25 सितंबर को उच्चतम दर निर्धारित की लेकिन कंपनियों को अगले छह माह तक राज्य स्तर पर परिवहन लागत जोडऩे की छूट के साथ। हालांकि, परिवहन लागत तय करने की जिम्मेदार प्रदेश सरकार पर थी। एनपीपीए ने तरल ऑक्सीजन की कीमत 15.22 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर और ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत 25.71 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर तय कर रखी है। कंपनियों के अनुसार परिवहन लागत के कारण उनके लिए एनपीपीए द्वारा तय दरों पर ऑक्सीजन का निर्माण और आपूर्ति संभव नहीं है। पीएचएएनए ने राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण को पत्र लिख हस्तक्षेप की अपील की थी।

Nikhil Kumar Reporting
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