निवेश आकर्षित करने में प्रथम स्थान पर कायम: देशपांडे

राज्य के वृहद व मध्यम उद्योग मंत्री आरवी देशपांडे ने दावा किया कि औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के मामले में कर्नाटक ने देश में अपना प्रथम स्थान कायम रख

By: शंकर शर्मा

Published: 10 Nov 2017, 10:41 PM IST

बेंगलूरु. राज्य के वृहद व मध्यम उद्योग मंत्री आरवी देशपांडे ने दावा किया कि औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के मामले में कर्नाटक ने देश में अपना प्रथम स्थान कायम रखा है। राज्य ने देश में कुल निवेश इरादों का 44.3 फीसदी प्राप्त किया है सितंबर 2017 तक राज्य में कुल 1 लाख 47 हजार 625 करोड़ रुपए प्रस्ताव मिले हैं।

देशपांडे ने गुरुवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि डीआईपीपी के एसआईए सूचकांक के मुताबिक पिछले दो दशक में आर्थिक व प्रशासनिक सुधार लागू करने से कर्नाटक वैश्विक बाजार आधारित अर्थव्यवस्था में एक निवेश आकर्षित करने वाली अर्थव्यवस्था में तब्दील हो गया है और अब इसे वैश्विक स्तर पर अत्यंत आकर्षक निवेश स्थल के तौर पर पहचाना जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य व्यापार हितकारी नीतियों निवेशकों के लिए सिंगल विंडो स्वीकृति के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेशों को आकर्षित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है और उसने उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण व समय पर सेवाएं प्रदान करने के लिए सकाल को शुरू किया है।

सफाई के बाद झील में फिर गंदे पानी से प्रदूषण
कोरमंगला के तीसरे ब्लॉक स्थित मेस्त्रीकेरे झील को बचाने के लिए स्थानीय निवासी २० वर्ष से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसी के परिणाम स्वरूप हाल में इस झील की सफाई और जीर्णोद्धार किया गया। लेकिन अब सीवर लाइन टूटने के कारण फिर झील में गंदा पानी मिलने लगा है।


बेंगलूरु जलापूर्ति तथा सीवर निस्तारण बोर्ड (बीडब्लूएसएसबी) के स्थानीय कार्यकारी अभियंता के मुताबिक इस क्षेत्र में पुरानी पाइप लाइनें हटाकर नई लाइनें बिछाई जा रही हैं। यह काम पूरा होने के बाद झील में सीवरेज ो प्रदूषण होने लगा। बोर्ड जान-बूझकर इसमें सीवरेज नहीं छोड़ रहा है। लेकिन स्थानीय निवासी इसके लिए बोर्ड को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। झील को बचाने के लिए स्थानीय निवासियों तथा विभिन्न संगठनों ने कई वर्ष तक संघर्ष किया है लेकिन निगम ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

इसे लेकर बीबीएमपी तथा बीडीए के बीच लंबे समय तक ठनी थी। दोनों संस्थानों मे से कोई भी इसके उन्नयन का दायित्व लेने को तैयार नहीं था। लालफीताशाही के चलते मामला 20 वर्ष तक ठंडे बस्ते में था।

शंकर शर्मा
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