मलबों की निगरानी कर अंतरिक्ष में राह दिखाएगा 'स्कॉट'

अंतरिक्ष में भी मिलेगी गूगल मैप जैसी सुविधा!
भारतीय स्टार्टअप कंपनी ने विकसित की तकनीक

 

 

By: Rajeev Mishra

Published: 14 Sep 2021, 07:48 PM IST

बेंगलूरु.
कल्पना करें कि बाह्य अंतरिक्ष में भी नौसंचालन (नेविगेशन) के लिए आपको वैसी ही सुविधाएं मिले जैसे धरती पर गूगल मैप से मिलती हैं। बेंगलूरु आधारित एक स्टार्टअप कंपनी इस कल्पना को साकार करने जा रही है।

अमूमन अंतरिक्ष एजेंसियां धरती की निचली कक्षा में नेविगेशन के लिए कैमरे की मदद लेती हैं। कैमरे की पैनी निगाह से अवांछित वस्तुओं (अंतरिक्षीय मलबे आदि) का पता लगाया जाता है और उसे ट्रैक किया जाता है। उपग्रहों के प्रक्षेपण अथवा सुचारू परिचालन के लिए यह आवश्यक होता है। बेंगलूरु की एक स्टार्टअप कंपनी 'दिंगतर' ने ऐसी तकनीक विकसित है जिससे लेजर लाइट के जरिए ही अंतरिक्ष में वस्तुओं को टै्रक किया जा सकेगा। इस तकनीक के लिए कंपनी को पेटेंट भी मिल चुका है।

दरअसल, पृथ्वी की निचली कक्षा में 50 हजार से अधिक मलबे हैं। इनमें से लगभग 23 हजार अंतरिक्षीय मलबों की सूची तैयार की गई है जिनपर नजर रखी जाती है। बेंगलूरु आधारित दिगंतर ऐसी स्टार्ट अप कंपनी है जो सिर्फ अंतरिक्ष आधारित निगरानी एवं पारिस्थितिक जागरुकता (एसएसए) के लिए समर्पित है। कंपनी ने अंतरिक्ष में मौजूद सूक्ष्म वस्तुओं का पता लगाने और अंतरिक्षीय मौसम की सटीक जानकारी के लिए एक 'एसएसए सोल्यूशन सुइट' विकसित किया है।

तीन घटकों से बनी तकनीक
कंपनी के सीइओ अनिरुद्ध शर्मा ने कहा कि यह एसएसए प्लेटेफार्म मुख्य रूप से तीन घटक (प्रौद्योकियां) हैं। पहला घटक है अंतरिक्ष आधारित अंतरिक्ष जलवायु एवं वस्तु ट्रैकर यानी 'स्कॉट'। यह एक उन्नत निगरानी सेंसर है जो अंतरिक्ष में वस्तुओं को ट्रैक करता है और अंतरिक्ष के मौसम के बारे में जानकारी देता है। दूसरा घटक है 'आर्बिटल इंजन'। यह स्कॉट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कक्षा के बारे में सूझबूझ प्रदान करता है। तीसरा है 'स्पेस-एडॉप्ट' जो स्कॉट और आर्बिटल इंजन से प्राप्त आंकड़ों से तैयार उत्पादों का समूह है। ये धरती की निचली कक्षा को पूरी तरह कवर करेंगे और वहां मौजूद 1 सेमी छोटी वस्तु की भी सक्रिय निगरानी कर सकेंगे।

अगले वर्ष उपग्रह लांच करने की योजना
इन उपकरणों को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए कंपनी उपग्रहों का एक नक्षत्र पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगी। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2022 के दूसरे उत्तराद्र्ध में कंपनी अपना पहला उपग्रह लांच करने की योजना बना रही है। इसके लिए बातचीत प्रगति पर है। शर्मा ने कहा कि इससे उन्नत अंतरिक्ष आधारित निगरानी एवं पारिस्थितिक जागरुकता जैसे आर्बिट विजुअलाइजेशन, टकराव का मूल्यांकन, उपग्रहों के मैनुवर की योजना तैयार करने, कक्षा में जोखिम का पता लगाने से लेकर कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी।

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Rajeev Mishra Reporting
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