scriptDespite covid restrictions Karnataka congress began Mekedatu Padayatra | कर्नाटक : ताक पर पाबंदी, कर्फ्यू के बीच कांग्रेस ने शुरू की मैकेदाटू पदयात्रा | Patrika News

कर्नाटक : ताक पर पाबंदी, कर्फ्यू के बीच कांग्रेस ने शुरू की मैकेदाटू पदयात्रा

- पदयात्रा में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल
- खरगे, सिद्धरामय्या, शिवकुमार सहित प्रमुख नेताओं ने की अगुवाई

बैंगलोर

Updated: January 10, 2022 03:45:15 pm

बेंगलूरु. कोविड-19 प्रतिबंधों और सप्ताहांत कर्फ्यू के बावजूद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने तमिलनाडु के साथ कानूनी तकरार में फंसी मैकेदाटू परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए रविवार को पदयात्रा की शुरुआत कर दी।

पदयात्रा की शुरुआत रामगनर जिले के कनकपुर तालुक स्थित कावेरी और अर्कावती नदियों के संगम से हुई। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार सहित अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पदयात्रा की शुरुआत की। इससे पहले शिवकुमार ने नदी में डुबकी लगाई और पूजा की। शिवकुमार ने मंच पर पहुंचने से पहले छोटी नौका में पदयात्रा के झंडे के साथ संगम पर सवारी भी की।

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हमारा जल-हमारा अधिकार नामक पदयात्रा 15 विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए 179 किमी दूरी तय कर 19 जनवरी को बेंगलूरु पहुंचेगी। बेंगलूरु पहुंचने पर बसवनगुड़ी मैदान में एक विशाल जनसभा का आयोजन होगा। रैलियों और सभाओं पर कोरोना प्रतिबंध के बावजूद हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता इस पदयात्रा में भाग ले रहे हैं। पदयात्रा की शुरुआत से पहले विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने पौधे लगाए और कांग्रेस नेताओं ने ड्रम बजाया।

कावेरी बेसिन में सियासी तपिश बढ़ी
पदयात्रा को लेकर वोक्कालिगा बहुल दक्षिण कर्नाटक के कावेरी बेसिन में सियासी तपिश बढ़ गई है। माना जा रहा है कि बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) और विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की यह पदयात्रा गेमचेंजर साबित होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बेंगलूरु शहरी, रामनगर, कोलार, मैसूरु, चामराजनगर, मंड्या, बेंगलूरु ग्रामीण और चिकबल्लापुर जिले में पार्टी की संभावनाओं को मजबूत करना है। पदयात्रा की योजना बनाने वाले शिवकुमार ने कहा कि यह बेंगलूरु, रामनगर और अन्य जिलों के लोगों के कल्याण के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसमें कोई राजनीति नहीं हो रही है।

शिवकुमार की नजर सीएम की कुर्सी पर
सूत्रों का यह भी कहना है कि इसी के बहाने शिवकुमार विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं। पदयात्रा को उचित ठहराते हुए शिवकुमार ने कहा देश में कोरोना नहीं है। यह सिर्फ भाजपा की देन है। यह पदयात्रा ढाई करोड़ जनता की पानी की जरूरतें पूरा करने के लिए है।

भाजपा के तमिलनाडु में निहितार्थ से हो रही देर
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि भाजपा तमिलनाडु में अपना आधार मजबूत करने के लिए इस परियोजना को शुरू करने में देर कर रही है। उन्होंने परियोजना के लिए अपनी सरकार की ओर से किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि यह किसी भी कीमत पर नहीं रोकी जाएगी। भले ही सरकार इसके खिलाफ आदेश पारित करे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि तमिलनाडु ने इस परियोजना का विरोध कर बेवजह विवाद खड़ा किया है।

राजनीति प्रेरित, कानून के अनुसार होगी कार्रवाई: सीएम
इस बीच कोरोना से प्रभावित बेंगलूरु में पदयात्रा की अनुमति देने अथवा नहीं देने के विषय पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई तथा तथा अन्य नेताओं ने सुबह में बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पदयात्रा राजनीति से प्रेरित है और प्रतिबंधों के उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कोविड-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान इस परियोजना को लागू नहीं किया और अब राजनीतिक फायदे के लिए पदयात्रा निकाल रही है। बोम्मई ने कहा कि परियोजना को लेकर कांग्रेस की कोई राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं है। पिछली गठबंधन सरकार में शिवकुमार जल संसाधन मंत्री थे। लेकिन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पेश नहीं की गई। पार्टी ने पिछले 3 वर्षों में परियोजना के लिए आवाज उठाने की जहमत नहीं उठाई।

बोम्मई ने कहा कि अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, उन्होंने राजनीतिक प्रेरणा से पदयात्रा निकाली है। कांग्रेस को अपराधबोध की भावना सता रही है क्योंकि उन्होंने सत्ता में अपने शासनकाल के दौरान परियोजना को लागू करने के लिए कुछ भी नहीं किया था। इसलिए वे लोगों को गुमराह बनाने के लिए बाहर निकले हैं। यह एक राजनीतिक पदयात्रा है।

बोम्मई कहा कि मैकेदाटू परियोजना के लिए भाजपा ने अपनी प्रतिबद्धता साबित कर दी है। मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग और कावेरी निगरानी बोर्ड को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। इस महीने परियोजना पर एक बैठक होगी और उपयुक्त निर्णय की उम्मीद है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कानूनी मोर्चे पर भी कमर कस ली है।

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