जनता दल एस का दामन छोड़ सकते हैं देवगौड़ा!

भाजपा नेता संतोष से मुलाकात को लेकर कयासों का दौर जारी

By: Priyadarshan Sharma

Published: 02 Mar 2020, 05:52 PM IST

बेंगलूरु. पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे जद-एस नेता जीटी देवगौड़ा की भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष से मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में कयासों का दौर जारी है। पूर्व मंत्री देवगौड़ा और जद-एस के बीच पिछले कई महीनों से दूरी बनी हुई है।

जानकारी के मुताबिक देवगौड़ा ने शनिवार देर शाम बेंगलूरु में संतोष से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक हालात को लेकर चर्चा हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात प्रदेश अध्यक्ष जद-एस अध्यक्ष एचके कुमारस्वामी के देवगौड़ा के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी के कुछ ही घंटे बाद हुई। सूत्रों का कहना है कि मुलाकात के दौरान देवगौड़ा के भाजपा में शामिल होने और पार्टी से उम्मीदों को लेकर चर्चा हुई।

जानकारों का कहना है कि गठबंधन सरकार के पतन के बाद से ही जीटी देवगौड़ा और जद-एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमार कुमारस्वामी के बीच दूरी ज्यादा बढ़ गई। हालांकि, पार्टी नेतृत्व और देवगौड़ा के बीच मनमुटाव काफी समय से चल रहा है। चामुंडेश्वरी में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता सिद्धरामय्या को हराने वाले देवगौड़ा गठबंधन सरकार में उच्च शिक्षा विभाग दिए जाने को लेकर भी नाराज थे। देवगौड़ा विधानसभा चुनाव में अपने बेटे को टिकट नहीं दिए जाने को लेकर नाराज थे।

पिछले साल दिसम्बर में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी देवगौड़ा प्रचार से दूर रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा सहित देवगौड़ा के कई कारण पार्टी को मुश्किल में डालते रहे हैं। कुछ समय से देवगौड़ा और भाजपा की बीच बढ़ती नजदीकियां राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय रही हैं। पिछले महीने हुए विधान परिषद उपचुनाव में मतदान नहीं करने के पार्टी के निर्णय के बावजूद देवगौड़ा ने भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मण सवदी के पक्ष में वोट दिया था।

नोटिस जारी कर सकता है जद-एस
जद-एस सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व देवगौड़ा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच डी देवगौड़ा भी जीटी देवगौड़ा की गतिविधियों को लेकर नाराज हैं। पिछले कई महीने से देवगौड़ा पार्टी की गतिविधियों से दूर हैं, वे पार्टी की बैठकों या सम्मेलन में भी शामिल नहीं हो रहे। पिछले सप्ताह हुए पार्टी विधायकों की बैठक में देवगौड़ा शामिल नहीं हुए थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व देवगौड़ा को दल विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित करने पर भी विचार कर रहा है। जीटी देवगौड़ा की भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात को लेकर पार्टी के राष्ट्ररीय अध्यक्ष देवगौड़ा भी नाराज हैं। सूत्रों के मुताबिक जद-एस प्रमुख ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एचके कुमारस्वामी को जीटी देवगौड़ा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस का जबाव मिलने के बाद जद-एस नेतृत्व जीटी देवगौड़ा को लेकर निर्णय करेगा। प्रदेश अध्यक्ष कुमारस्वामी ने शनिवार को कहा था कि जीटी देवगौड़ा का तन जद-एस में हैं तो मन कहीं और है, उन्हें यह तय कर लेना चाहिए कि वे जद-एस में हैं या भाजपा में जा रहे हैं।

राजनीतिक विश£ेषकों का कहना है कि अगर जीटी देवगौड़ा पार्टी छोड़ते हैं या उन्हें निष्कासित किया जाता है तो दोनों ही स्थितियों में जद-एस को ही पुराने मैसूरु क्षेत्र में नुकसान होगा। वोक्कालिगा बहुल इस क्षेत्र में जद-एस की पकड़ हो रही है और जीटीडी देवगौड़ा का जाना पार्टी के लिए झटका साबित हो सकता है। जद-एस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले मण्ड्या जिले में पहली बार दिसम्बर में हुए विधान सभा उपचुनाव में भाजपा का खाता खुला था। देवगौड़ा पहले भी भाजपा में रह चुके हैं।

भाजपा में सबका स्वागत : अश्वथ
भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण ने रविवार को जीटी देवगौड़ा का नाम लिए बिना कहा कि अगर कोई पार्टी की विचाराधारा व सिद्धांतों में भरोसा कर आना चाहता है तो उसका स्वागत है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी राष्ट्रीय स्तर की है लिहाजा किसी के शामिल होने के बारे में वरिष्ठ नेता ही निर्णय लेंगे। अश्वथ ने कहा कि इस बारे में सही समय पर संबंधित लोग निर्णय लेते हैं, इसलिए वे अभी कुछ नहीं कह सकते हैं।

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