चुनाव लडऩे के सवाल पर देवेगौड़ा ने साधा मौन, वंशवाद के आरोपों से आहत

चुनाव लडऩे के सवाल पर देवेगौड़ा ने साधा मौन, वंशवाद के आरोपों से आहत

Santosh Kumar Pandey | Publish: Mar, 17 2019 05:52:45 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 05:52:46 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

पूर्व प्रधानमंत्री व जद एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवगौड़ा पारिवारिक राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप से दबाव में हैं। जद-एस को मिले 8 लोकसभा सीटों में से 3 सीटों पर एक ही परिवार के प्रत्याशी होने का सोशल मीडिया में व्यापक विरोध हो रहा है।

बेंंगलूरु. पूर्व प्रधानमंत्री व जद एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवगौड़ा पारिवारिक राजनीति को बढ़ावा देने के आरोप से दबाव में हैं। जद-एस को मिले 8 लोकसभा सीटों में से 3 सीटों पर एक ही परिवार के प्रत्याशी होने का सोशल मीडिया में व्यापक विरोध हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि इससे खिन्न देवगौड़ा अंतिम क्षणों में चुनाव नहीं लडऩे का फैसला भी कर सकते है। पहले भी अपनी उम्र (88) का हवाला देकर उन्होंने चुनाव लडऩे से इनकार किया था। पिछले कुछ दिनों से देवगौड़ा ने फिर चुनाव लडऩे के सवाल पर मौन धारण कर लिया है।

मैसूरु नहीं मिलने से नाराज
बताया जा रहा है देवेगौड़ा पार्टी के खाते में मैसूरु लोकसभा क्षेत्र नहीं आने से नाराज हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के अडिय़ल रवैये से आहत हैं। जद (एस) के लिए क्षेत्रों की संख्या नहीं बल्कि क्षेत्र अधिक मायने रखता है। अभी आवंटित हुए 8 क्षेत्रों में से उडुपी-चिक्कमगलूरु, शिवमोग्गा, बेंगलूरु उत्तर तथा बीजापुर 4 क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पार्टी का कोई जनाधार ही नहीं है। इन चारों क्षेत्रों में भाजपा के सांसद होने से वहां गठबंधन की जीत के लिए कांग्रेस को ही पसीना बहाना पड़ेगा। उधर, पार्टी का दावा है कि देवगौड़ा और राहुल गांधी की अंतिम बैठक में कुछ लोकसभा क्षेत्रों की अदला-बदली हो सकती है।

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