स्मृति के लिए विस्मृति का विकास जरूरी-मुनि सुधाकर

हनुमंतनगर में धर्मचर्चा

By: Yogesh Sharma

Published: 05 Aug 2020, 04:55 PM IST

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर ने हनुमंतनगर स्थित तेरापंथ भवन में श्रद्धालुओं से चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में खुश रहने के लिए भूलने की कला सीखें। कुछ बातें याद रखने की होती हैं जिनसे हमें खुशी, उल्लास, उमंग और जीवन की जंग जीतने के लिए नया विश्वास मिलता है, पर कुछ यादें ऐसी होती है जिनको भूल जाना ही हमारे लिए कल्याणकारी होता है। यदि उन यादों को न भूला जाए तो वह यादें यातना बन कर सताने लगती हैं। उन यादों से शरीर का रूंह कांपने लगता है। क्योंकि उनसे हमारे शरीर में हिंसा, प्रतिशोध, ईष्र्या, निराशा, भय और अवसाद जैसी नकारात्मक भावनाएं पैदा होती है।
उन्होंने आगे कहा कि नकारात्मक यादों को भूलना ही हमारे मन के साथ-साथ शरीर के लिए भी अच्छा है। हमारा मन-मस्तिष्क जितना निर्भार होगा उतना ही स्वस्थ और शक्तिशाली बनेगा। आज विज्ञान, स्मृति-विकास की ओर तेजी से कार्य कर रहा है, स्मृति विकास के लिए नए-नए प्रोग्राम डिजाइन कर रहा है। किन्तु कभी-कभी ऐसा अनुभव होता है याद रखना आसान है भूलना कठिन है। याद रखें-स्मृति के लिए विस्मृति का विकास जरूरी है। मस्तिष्क की एक सीमा है इसमें आप उससे अधिक नहीं रख सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है। आपका माइंड पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहे या नेगेटिव। प्राचीन ऋषि मुनियों ने भी उस पर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। आचार्य भिक्षु ने शील की नवबाड़ में छठी बाड़ "स्मृति संयम" के नाम से बताई है। विस्मृति, भूलने की कला यानि आत्मस्थ बने रहने की एक सुंदर प्रक्रिया है।

Yogesh Sharma Reporting
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