धार्मिक साधना के लिए आनंदमय जीवन का विकास जरूरी: मुनि सुधाकर

हनुमंतनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 21 Sep 2020, 10:08 PM IST

बेंगलूरु. हनुमंतनगर स्थित तेरापंथ भवन में श्रद्धालुओं से धर्म चर्चा में मुनि सुधाकर ने कहा चिंता आधुनिक युग की ज्वलंत समस्या है। वह अनेक बीमारियों के जनक के रूप में उभर रही है। चिंता जीवन की अनंत शक्तियों को कुंठित कर देती है। इससे अनिद्रा, स्मरण शक्ति का कमजोर होना, कार्यक्षमता का क्षीण होना, चिड़चिड़ापन व थकान महसूस होना, नशे का आदि बना देना,और भी न जाने कैसी कैसी समस्याएं और बीमारियां जन्म ले रही हैं। चिंता एक प्रकार का मनोरोग है।

आज हर व्यक्ति के जीवन में इस रोग का प्रभाव दिखाई दे रहा है। धार्मिक मंत्रों के जाप से मनोबल का विकास होता है। इससे हम चिंता की समस्या पर विजय पा सकते हैं। धार्मिक साधना के लिए आनंदमय जीवन का विकास जरूरी है। तभी साधना में सफलता मिल सकती है। हमें चिंता नहीं चिंतन का विकास करना चाहिए चिंतन से हमारी विवेक चेतना जागृत होती है।

मुनि ने कहा कि समय परिवर्तनशील है। जीवन में उत्थान-पतन व सुख-दुख की लहरें उत्पन्न होती रहती हंै हमें अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में यह भी सदा नहीं रहेगा का मंत्र याद रखना चाहिए। सुख में सोचें सुख सदा नहीं रहेगा इसीलिए अभिमान करना भूल है दुख में सोचें सुख सदा नहीं रहा तो दुख भी सदा नहीं रहेगा। इस विचार से चिंता के भाव स्वत दूर हो जाएंगे। चिंता मुक्त रहने के लिए समत्व की साधना का विकास अपेक्षित है।

Santosh kumar Pandey Desk
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