देर से जागा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद !

  • एसएआरआइ की तरह इन् लूएंजा लाइक इल्लनेस के बढ़ते मामले चुनौती
  • 23 मरीज निकले पॉजिटिव, सभी को बचाने में मिली कामयाबी
  • 72 मरीज जांच के अधीन

By: Nikhil Kumar

Published: 16 May 2020, 09:21 PM IST

बेंगलूरु. सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (एसएआरआइ) के साथ इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) भी कोरोना वायरस (Corona Virus) के खिलाफ जंग में चुनौती बना हुआ है। आइएलआइ के साथ 15 मई तक भर्ती सभी 23 मरीज कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। इनमें से चार मामले अकेले सात मई को सामने आए थे। गत दो सप्ताह में ऐसे मरीज तेजी से बढ़े हैं। 29 अप्रेल तक आइएलआइ के छह मरीजों में ही कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। 29 अप्रेल से 15 मई के बीच 17 नए मरीज मिले। हालांकि कोरोना पॉजिटिव आइएलआइ के सभी मरीजों को बचाने में कामयाबी मिली है। कोरोना वायरस को हराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

कारण अज्ञात, संपर्क में आए लोगों की पहचान भी मुश्किल

स्वास्थ्य विभाग भी मानता है कि एसएआरआइ (severe acute respiratory infection) की तरह ही आइएलआइ (Influenza-like illness) के बढ़ते मामले कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं। ऐसे मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान भी आसान नहीं है। मामलों के बढऩे का मुख्य कारण है देर से पहचान। कोरोना जांच के दायरे में लोने के बाद से मरीजों की संख्या बढ़ी है।

तीन अध्ययन के अंतर्गत

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने एसएआरआइ और आइएलआइ मामलों के अध्ययन सहित दिशा-निर्देश जारी करने में देरी की। अब बेंगलूरु शहरी, कलबुर्गी और चित्रदुर्ग जिलों को आइसीएमआर ने अपने अध्ययन के अंतर्गत लाया है। कोरोना महामारी से निपटना है तो एसएआरआइ और आइएलआइ के तमाम मामलों की त्वरित पहचान करनी होगी।

छूट रहे थे मरीज

आइसीएमआर ने 20 मार्च को जारी दिशा-निर्देशों में एसएआरआइ और आइएलआइ के मरीजों को कोरोना जांच के अंतर्गत लाया था। इसके पहले ऐसे मरीज छूट रहे थे। एक दूसरे को संक्रमित कर रहे थे।

राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (National Institute of Mental Health and Neurosciences - निम्हांस) के वरिष्ठ ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. जी. गुरूराज के अनुसार एसएआरआइ और आइएलआइ के लक्षण कोविड-19 के समान हैं। सामुदायिक संक्रमण न फैले, मरीजों की मौत न हो और ऐसे मामलों को समय रहते प्रबंधित किया जा सके इसके लिए ऐसे मरीजों की पहचान जल्द करनी होगी।

कई जिलों ने उठाया ग्रीन जोन का लाभ

आइसीएमआर (ICMR) के सदस्य व ऐपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologists ) डॉ. गिरिधर आर. बाबू के अनुसार एसएआरआइ और आइएलआइ के बढ़ते मामलों का मतलब है कि प्रदेश ने निगरानी प्रणाली व दिशा-निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू किया है। हालांकि ऐसे मामलों की पहचान में देरी के कारण कई जिले लंबे समय तक ग्रीन जोन का लाभ उठाते रहे। हालांकि चिकित्सा शिक्षा व कोविड मंत्री डॉ. के. सुधाकर ने शुक्रवार को ट्वीट कर सामुदायिक संक्रमण से इनकार किया है। उनके अनुसार अब तक इसके लक्षण नहीं दिखे हैं।

36 में से 18 मृतक एसएआरआइ के

एसएआरआइ (The Indian Council of Medical Research) पहले से ही चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 13 से 15 मई के बीच एसएआरआइ के चार और मरीज मिले हैं। इन चार में से एक मरीज की मौत 15 मई को हुई। एसएआरआइ के मरीजों की संख्या 49 पहुंच गई है। 49 में से 18 मरीजों को बचाया नहीं जा सका है। प्रदेश में कोरोना से हुई 36 मौतों में से 18 मरीज एसएआरआइ वाले थे। एसएआरआइ और आइएलआइ के करीब 72 मामले अब भी जांच के अधीन हैं।

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Nikhil Kumar Reporting
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