लोस में अविश्वास प्रस्ताव : जनार्दन रेड्डी व कुमारस्वामी की भी चर्चा

 

बेंगलूरु. लोकसभा में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राज्य के नेताओं का जिक्र सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे को घेरने के लिए किया। अविश्वास पर चर्चा की शुरुआत करते हुए तेलुगूदेशम पार्टी (टीडीपी) के जयदेव गल्ला ने बल्लारी खनन घोटाले के कारण विवादों में घिरे रहे पूर्व मंत्री जी. जनार्दन रेड्डी का नाम लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा। गुंटूर से लोकसभा सदस्य गल्ला ने कहा कि मोदी ने कर्नाटक में दागी रेड्डी का समर्थन किया।

जवाब मेें जबलपुर से भाजपा सांसद राकेश सिंह ने विपक्ष और कांग्रेस पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी को लेकर पलटवार किया। सिंह ने टीडीपी के सांसदों से कहा कि वे कांग्रेस के साथ जाने से पहले कुमारस्वामी के आंसू नहीं भूलें।

गौरतलब है कि बल्लारी खनन घोटाले में गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने रेड्डी बंधुओं से किनारा कर लिया था, लेकिन मई में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जनार्दन रेड्डी के दो भाइयों सहित उनके आधा दर्जन से ज्यादा समर्थकों को टिकट दिया था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रेड्डी बंधुओं के साथ मंच साझा करने से बचने के लिए बल्लारी का दौरा रद्द कर दिया था, जबकि बल्लारी की रैली में मोदी के साथ जनार्दन रेड्डी के भाई सोमशेखर मौजूद रहे थे।

पिछले सप्ताह कुमारस्वामी ने जद-एस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आंसू भरे नेत्रों से कहा था कि वे नीलकंठ की तरह गठबंधन का विष पी रहे हैं। हाालांकि, बाद में कुमारस्वामी ने कहा कि वे भावुक हो गए थे और उनका इशारा कांग्रेस की ओर नहीं था।

राजनाथ सिंह ने भी कर्नाटक के स्थानों एवं प्रतीकों का जिक्र किया और कहा कि जब आत्मा संशय के साथ घिर जाती है तो मनुष्य के अंदर अहंकार पैदा होता है। आपने भले ही भारत का इतिहास नहीं पढ़ा हो। 11वीं शताब्दी में कर्नाटक में अनुभव मंडप था जो मैग्नाकार्टा से भी पुराना माना जाता है। वहां चर्चा होती थी। उसी आधार पर सहमति पर नियम कानून बनते थे और उनका पालन किया जाता था। चोल साम्राज्या की राजधानी तंजावुर थी जहां छोटी छोटी कमेटी होती थी और वहां लोकतांत्रिक परंपरा थी। 600 ईसा पूर्व में दुनिया का सबसे प्राचीन गणराज्य भी भारत में वैशाली के रूप में था। बर्मा तक चंद्रगुप्त मौर्य का राज था। जैन पद्धति से उनका राज्याभिषेक हुआ था। वो बाद में संन्यास लेकर श्रवणबेलागोला जो कर्नाटक में है वहां चले गए। ये जवाहरलाल नेहरू ने भी डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में लिखा है। भारत में भेड़ बकरी चराने वाला चंद्रगुप्त मौर्य राजा बन गया और चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन गया। यह भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप के कारण संभव हो सका है।

कुमार जीवेन्द्र झा Incharge
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