रिसाव बना पेयजल आपूर्ति में बाधा

हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर कई योजनाओं से विकास के पथ पर अग्रसर होते हुए राज्य तथा राष्ट्र स्तर पर चिन्हित हो रहा है, इसके बावजूद मूलभूत समस्याओं से यह अब तक बाहर नहीं निकल सका है।

By: शंकर शर्मा

Published: 07 Jun 2018, 10:13 PM IST

हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर कई योजनाओं से विकास के पथ पर अग्रसर होते हुए राज्य तथा राष्ट्र स्तर पर चिन्हित हो रहा है, इसके बावजूद मूलभूत समस्याओं से यह अब तक बाहर नहीं निकल सका है। इस जुड़वां शहर में पेयजल समस्या खास तौर पर है। नीरसागर जलाशय के सूखने के कारण पानी के लिए मलप्रभा पर ही निर्भर होना पड़ रहा है परन्तु आपूर्ति होने वाले पानी में पांच एमएलडी पानी बेकार बह कर नालियों में मिल रहा है।


दीया तले अंधेरा कहावत के तहत हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम केंद्रीय कार्यालय के बगल में ही स्थित चिटगुप्पी उद्यान से लगी सडक़ के द्वार पर ही पानी रिसाव हो रहा है। पाइपलाइन टूटने के कारण दो-तीन दिन से पानी बहकर लैमिंगटन रोड पर बह रहा है। महानगर निगम की लापरवाही का यह जीता-जागता सबूत है।


आठ-दस दिन में हो रही जलापूर्ति
पुरानी हुब्बल्ली भाग के नवअयोध्या नगर, एसएम कृष्णा नगर समेत विभिन्न भागों में जलदाय विभाग पानी की कमी के कारण आठ-दस दिन में एक बार जलापूर्ति कर रहा है। तकनीकी समस्या नजर आने पर वह फिर तीन-चार दिन विस्तारित होकर 12 दिन में एक बार जलापूर्ति करने के उदाहरण सामने हैं।

पेयजल समस्या शहरी इलाके में इतनी अधिक होने पर पानी रिसाव रोकने के लिए अधिकारियों को विशेष ध्यान देना चाहिए था परन्तु प्रशासनिक केंद्र के बगल में ही पाइपलाइन के टूटने पर भी महानगर निगम के पार्षद हो या फिर अधिकारी हो अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इसके बावजूद लाखों लीटर पानी रिसाव की रोकथाम के लिए कैसे कार्रवाई करेंगे। जनता से शिकायत आने पर ही कार्रवाई करने की मानसिकता आम जनता की समस्या के लिए कारण बनी हुई है।


प्यास बुझाने के लिए मलप्रभा पर निर्भरता
जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उम्मीद के हिसाब बारिश नहीं होने से पिछले तीन वर्षों से नीरसागर जलाशय से जुड़वां शहर को जलापूर्ति नहीं हो रही है। इससे पुरानी हुब्बल्ली भाग की जनता को मलप्रभा के पानी पर ही निर्भर होना पड़ रहा है। मलप्रभा जल को पुरानी हुब्बल्ली भाग को नियमित तौर पर जलापूर्ति के लिए वैज्ञानिक पाइपलाइन मार्ग नहीं है तथा मलप्रभा से इस भाग के लिए भी बहुत सारा पानी पंप करने में अत्यधिक तकनीकी समस्याएं हैं। इस कारण से धारवाड़ तथा नई हुब्बल्ली को आपूर्ति होने वाले पानी में ही थोड़ा पानी पुरानी हुब्बल्ली भाग को आपूर्ति किया जा रहा है।

यह पाइप लाइन 15-20 वर्ष पुराने होने से जलापूर्ति के दौरान दबाव सह नहीं पाने से हर कहीं टूट कर पानी रिसाव हो रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि नए पाइपलाइन तथा नियमित जलापूर्ति के पाइप लाइन सभी टूटे नहीं हैं ऐसा नहीं है वह भी कई जगहों पर टूटे हैं जिससे प्रतिदिन हजारों लीटर पानी रिसाव हो रहा है।


व्यर्थ बह रहा है 50 लाख लीटर पानी
जलदाय विभाग के आकलन के हिसाब से एक माह में 40 से 50 लाख लीटर पानी जुड़वां शहर में विभिन्न कारणों से रिसाव हो रहा है। इसमें पाइप लाइन टूटने से 6 0 प्रतिशत पानी बर्बाद हो रहा है। बकाया सार्वजनिक नलकूपों, घर-घर कनेक्शन उपलब्ध करने वाले नलकुपों में, होटलों में जरूरत से ज्यादा पानी रिसाव हो रहा है। फारेस्ट कालोनी के पास स्थित जलदाय विभाग के वाटर टैंक दो दिन के अधिकतर समय उफनता रहता है।

वाणिज्य भवनों तथा सार्वजनिक संपर्क उपलब्ध करने वाले नलकूप अधिकतर अवैज्ञानिक तौर पर होने से बेहिसाब पानी बह जाता है। हर बार जलापूर्ति करने पर भी एक एक वार्ड में न्यूनतम दस जगहों पर पाइपलाइन टूटने से पानी बर्बाद होता है। अधिकतर शाम तथा रात्रि के समय जलापूर्ति करने से कहां पानी रिसाव हो रहा है इसका पता लगाना अधिकारियों के लिए भी कठिन हो रहा है। जलापूर्ति हुए वार्डों के नालियां बारिश होने पर जिस प्रकार बहती हैं वैसे बहती हुई सुबह नजर आती हैं।


मात्र 91 एमएलडी पानी की आपूर्ति
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शहरी इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति को प्रतिदिन 150 लीटर के हिसाब से चार सदस्यों वाले परिवार के लिए 550 लीटर पानी की जरूरत है। जुड़वां शहर में 14 लाख की आबादी है तो प्रतिदिन 210-220 एमएलडी पानी चाहिए।

पानी का स्रोत एकमात्र मलप्रभा होने से वहां भी अधिकतर पानी नहीं होने के कारण फिलहाल 91 एमएलडी पानी ही हुब्बल्ली-धारवाड़ की जनता को आपूर्ति हो पा रहा है अर्थात 120 एमएलडी पानी की कमी यहां की जनता झेल रही है। इसमें पांच एमएलडी पानी हर माह रिसाव हो रहा है तो इसकी रोकथाम करने पर चार सदस्यों वाले नौ हजार परिवारों को प्रतिदिन नियमित जलापूर्ति कर सकते हैं। गर्मियों के अप्रेल, मई में पेश आने वाली पानी की समस्या से कुछ हद तक समाधान कर सकते हैं।

विकास बना पाइपलाइन के लिए अभिशाप
जुड़वां शहर में चल रहे कुछ विकास कार्य भी पाइपलाइन टूटकर होने वाले पानी के रिसाव में अपना योगदान दे रहे हैं। वाणिज्य नगरी हुब्बल्ली में स्मार्टसिटी, बीआरटीएस, कंक्रीट सडक़, टेंडर श्योर सडक़, ओएफसी केबल बिछाने, भूमिगत हेस्काम केबल बिछाने, अन्य संपर्क साधन के केबल बिछाने का कहकर दसियों कार्य चल रहे हैं। इन सभी कार्यों के लिए जमीन को खोदने के लिए विशाल जेसीबी का ही इस्तेमाल करने से वे जलापूर्ति करने वाले पाइपलाइनों पर ही कार्य कर रहे हैं।

जेसीबी कार्य कर्मचारी शहर के किन किन इलाके में जलापूर्ति पाइपलाइन होकर गुजरी है इसका ज्ञान नहीं होने से मिट्टी को ऊपर उठाते समय पाइपलाइन को भी ऊपर उठा देते हैं। कुछ जगहों पर जेसीबी के भार के चलते पाइपलाइनें जगह-जगह टूट रही हैं तो और कुछ जगहों पर पाइपलाइन एक दूसरे से जुडऩे से किसी भी भाग में जेसीबी से थोड़ा भी हिलाने पर जॉइंट निकलने से पानी का रिसाव होता है।

शंकर शर्मा
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