शिकायत, निंदा व बराबरी के भाव न रखें

श्रमण संघीय रमणीक मुनि ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में किसी की शिकायत, निंदा व किसी भी व्यक्ति से बराबरी के भाव नहीं रखने चाहिए। उन्होंने कहा इन तीनों बिन्दुओं अथवा शब्दों को मनुष्य को अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 10 Jan 2019, 09:51 PM IST

बेंगलूरु. श्रमण संघीय रमणीक मुनि ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में किसी की शिकायत, निंदा व किसी भी व्यक्ति से बराबरी के भाव नहीं रखने चाहिए। उन्होंने कहा इन तीनों बिन्दुओं अथवा शब्दों को मनुष्य को अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए।

वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ विजयनगर संघ के तत्वावधान में स्थानक भवन में प्रवचन में मुनि ने कहा कि ऐसा व्यक्ति चाहे कितना भी धर्म-कर्म सामायिक कर ले, वह सब उसके लिए व्यर्थ होता है। उन्होंने कहा कि दूसरों की शिकायत, निंदा करने वाला तथा प्रतिस्पर्धा में बराबरी करने वाला व्यक्ति न स्वयं खुश रह सकता है तथा ना ही किसी और को प्रसन्न कर सकता है। व्यक्ति यदि अपने सामाजिक जीवन में मुनिवृंदो के सान्निध्य में इस प्रकार के कृत्य से यदि दूर रहता है तो वह अपना जीवन सफल कर सकता है।

संचालन कन्हैयालाल सुराणा ने किया। इस अवसर पर राजाजीनगर संघ के पदाधिकारियों ने रमणीक मुनि से विनती की। वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ विजयनगर के महामंत्री शांतिलाल लोढ़ा ने बताया कि धर्मसभा में शांतिलाल भंडारी, आनंद फूलपगर, चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल, अशोक चौरडिय़ा, सुरेश बोहरा वसंत रांका उपस्थिति थे। शांतिलाल लोढ़ा ने बताया कि मुनि गुरुवार सुबह 6.15 बजे यहां से विहार कर राजाजीनगर स्थानक भवन में पधारेंगे तथा शुक्रवार से प्रवचन सुबह 9.15 बजे से राजाजीनगर में होगा।

Santosh kumar Pandey Desk
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