‘बैंक बैलेंस’ के लिए जीवन का ‘बैलेंस’ नहीं बिगाड़ें: डॉ.समकित मुनि

केशी गौतम संवाद एवं श्रीकृष्ण सुदामा चारित्र

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 08 Oct 2020, 10:34 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में श्रमण संघीय डॉ.समकित मुनि ने केशी-गौतम संवाद पर प्रवचन में कहा कि प्रत्येक संसारी जीव के अंतर हृदय में तृष्णा रूपी ऐसी लता है, जो जहरीले फल देती ही है। जहर का सेवन करने वाला मरण को प्राप्त होता ही है। इंसान प्रतिपल इन जहरीले फलों को खाकर कहता है। मैं जी रहा हूं परंतु हकीकत यह है कि व्यक्ति प्रतिक्षण मृत्यु के मुंह में जा रहा है। जो इंसान लालच के चक्कर में अटकता है, परेशानी का कांटा उसके गले में फंसता ही है। लोभ में आकर आदमी बेइमानी कर जाता है, बैंक बैलेंस को बढ़ाने के लिए व्यक्ति जीवन का बैलेंस बिगाड़ रहा है।

मुनि ने कहा कि जब आंख के बंद होते ही सब कुछ बदल जाएगा तो फिर क्यों जिंदगी को लोभ में बिताना। तृष्णा जहरीले फल देती है यह जानते हुए भी दुनिया जहर एकत्र करने में लगी है, जिस कारण से अमृत समान मानव जीवन जहर बन जाता है। मरने के बाद जो साथ चलेगा नहीं उसके पीछे अनमोल जिंदगी दांव पर मत लगाओ।

श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती की कथा सुनाते हुए कहा कि माधुर्य (मिठास) किसी वस्तु में नहीं बल्कि देने वाले के दिल में होता है। प्रेम से खिलाई गई सूखी रोटी नफरत से खिलाए छप्पन पकवानों से बढक़र होती है। श्रीकृष्ण ने सारी दुनिया को यह संदेश दिया कि दोस्ती बराबर वालों से की जाए यह जरूरी नहीं, बल्कि दोस्ती में सब बराबर होते हैं। कोई बड़ा छोटा नहीं होता। संचालन संघ के मंत्री मनोहरलाल बंब ने किया।

Santosh kumar Pandey Desk
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