scriptDoctor dream : lack of seats forced students to forigen route 10101 | डॉक्टर बनने का सपना: 'योग्य' होने पर भी कम सीटों के कारण विदेश जाने को मजबूर हैं छात्र | Patrika News

डॉक्टर बनने का सपना: 'योग्य' होने पर भी कम सीटों के कारण विदेश जाने को मजबूर हैं छात्र

आसानी से दाखिला, कम खर्च के कारण लुभाते हैं यूक्रेन जैसे देश

बैंगलोर

Published: March 04, 2022 02:54:20 am

बेंगलूरु. योग्य होने के बावजूद देश के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश नहीं मिल पाने के कारण हर साल हजारों विद्यार्थी डॉक्टर बनने का सपना लिए यूक्रेन जैसे देशों का रूख करने को मजबूर होते हैं। आसानी से नामांकन और कम खर्च के कारण यूक्रेन जैसे देश इन विद्यार्थियों को लुभाते हैं। ऐसा नहीं है कि विदेशी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने के लिए विवश ये छात्र योग्य नहीं हैं अथवा उनमें प्रतिभा की कमी हो। ये देश में मेडिकल सीटों की मांग और उपलब्धता के बीच भारी अंतर से उपजी स्थिति के कारण अपने सपने को पूरा करने के लिए दूसरे देशों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। देश में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए योग्यता परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों में से 10 प्रतिशत को भी सीट नहीं मिल पाती है।
  MBBS
MBBS
earning_money.jpgमहंगी पढ़ाई भी कारक
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न कोटे में कम शुल्क पर दाखिला मिल जाता है मगर निजी मेडिकल कॉलेजों में यह फीस काफी ज्यादा होती है। प्रबंधन (ओपन) कोटे की सीटों में फीस और भी ज्यादा होती है। देश में निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च 30 लाख से डेढ़ करोड़ रुपए तक आता है जबकि यूक्रेन जैसे देशों में 25-30 लाख रुपए में पढ़ाई पूरी हो जाती है। दिसम्बर 2021 में लोकसभा में दिए सरकार के आंकड़ों के मुताबिक शैक्षणिक वर्ष 2018-19 में 274 और 2019-20 में 273 एमबीबीएस सीटें रिक्त रह गई। जानकारों का कहना है कि सीटों के रिक्त रहने के पीछे अधिक शुल्क भी एक कारक है। हालांकि, एनएमसी ने अगले सत्र से निजी मेडिकल कॉलेजों को भी 50 प्रतिशत सीटें संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारी सीटों के समान शुल्क पर उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
mdsu admission processएक सीट के लिए 19 दावेदार
देश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनइइटी यूजी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। वर्ष 2021 में 15.44 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने एनइइटी की परीक्षा दी थी जिसमें से 8.70 लाख से ज्यादा उत्तीर्ण हुए जबकि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में देश के 562 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 84,649 सीटें ही उपलब्ध थी। यानी, एमबीबीएस की एक सीट के लिए 19 दावेदार थे। वर्ष 2020 में 13.66 लाख छात्रों ने एनइइटी दी थी जिसमें से 7.71 लाख उत्तीर्ण हुए थे। हर साल करीब 7-8 लाख विद्यार्थी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए योग्य होने के बावजूद दाखिला पाने से वंचित रह जाते हैं। जानकारों का कहना है कि इनमें से जिन छात्रों का परिवार आर्थिक तौर पर सक्षम होता है वे विदेश में पढ़ाई का विकल्प चुनते हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की वेबसाइट पर शुक्रवार को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश के 605 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 90,825 सीटें हैं।
निजी क्षेत्र पर टिकी उम्मीदें
जानकारों का कहना है कि देश में निजी मेडिकल की पढ़ाई महंगा होने का कारण सीटों की सीमित संख्या है। पिछले कुछ सालों के दौरान सीटों की संख्या बढ़ी है मगर यह मांग के अनुपात में काफी कम है। दिसम्बर 2021 में सरकार ने लोकसभा को बताया था कि एनएमसी के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2021 के बीच देश में 209 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई। इसमें से 132 सरकारी और 77 निजी क्षेत्र के थे। वर्ष 2014 से पहले एमबीबीएस की 51,348 सीटें थी जो 72 प्रतिशत वृद्धि के साथ दिसम्बर 2021 में 88,120 हो गई। स्नातकोत्तर की सीटें भी इस अवधि में 31,185 से 78 प्रतिशत बढ़कर 55,595 हो गई।
doctorएमबीबीएस सीटों की स्थिति
वर्ष कॉलेज - सीटें
2013-14 : 387 - 51,348
2014-15 : 404 - 54,348
2015-16 : 422 - 57,138
2016-17 : 472 - 65,183
2017-18 : 479 - 67,218
2018-19 : 499 - 70,012
2019-20 : 539 - 80,312
2020-21 : 558 - 83,275
2021-22 : 596 - 88,120

विदेशी डिग्री का मोह भी

मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन, चीन, रूस, जॉर्जिया और फिलीपींस जैसे देशों की लोकप्रियता की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २६ फरवरी को एक वेबिनार में कहा था कि भारतीय छात्र छोटे देशों में अध्ययन के लिए जा रहे हैं, विशेषकर चिकित्सा शिक्षा में। प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रवेश करने का आग्रह किया। हालांकि, शिक्षाविदों का कहना है कि सिर्फ निजी क्षेत्र के प्रवेश से ही समस्या हल नहीं हो जाएगी। एक कंसंल्टेंसी फर्म के प्रमुख पॉल चेल्लाकुमार ने कहा कि इंजीनियरिंग और प्रबंधन शिक्षा के अनुभवों को देखते हुए बेहतर व प्रभावी नियमन की जरुरत होगी ताकि शुल्क नियंत्रण के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे। एक अन्य कंसल्टेंट अभिनव एमके ने कहा कि छोटे शहरों से आने वाले छात्रों में कम खर्च में विदेशी डिग्री का मोह भी उन्हें छोटे देशों में पढ़ाई के लिए आकर्षित करता है।
एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक दूसरे स्थान पर
एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य के 63 मेडिकल कॉलेजों में की 9,795 सीटें हैं जबकि महाराष्ट्र के 61 कॉलेजों में 9,600, तमिलनाडु के 69 कॉलेजों में 10,625, तेलंगाना के 34 कॉलेजों में 5,340, आंध्र प्रदेश के 31 कॉलेजों में 5,210 और उत्तर प्रदेश के 67 कॉलेजों में 8,678 सीटें हैं।


prajesh_jha.pngविदेश में पढऩे वाले भी उतने ही योग्य
देश या विदेश में कहीं भी मेडिकल की पढाई के लिए एक ही परीक्षा है एनइइटी। इसे पास किए बिना कहीं भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा। इसमें उत्तीर्ण कोई भी अभ्यार्थी एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले की योग्यता रखता है। भारत में एनइइटी में 150 नंबर लाने वाले छात्र का भी डेढ़ करोड़ रुपए फीस देने पर एमबीबीएस में एडमिशन हो जाता है और और 580 नंबर वाले योग्य बच्चे का भी दाखिला नहीं होता है। आर्थिक कारणों के अलावा भी इसमें कई कारक होते हैं। सीटों की मांग और उपलब्धता में अंतर सबसे बड़ा कारण है।
- प्रजेश कुमार झा, ग्लोबल करियर काउन्सलर

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

17 जनवरी 2023 तक 4 राशियों पर रहेगी 'शनि' की कृपा दृष्टि, जानें क्या मिलेगा लाभज्योतिष अनुसार घर में इस यंत्र को लगाने से व्यापार-नौकरी में जबरदस्त तरक्की मिलने की है मान्यतासूर्य-मंगल बैक-टू-बैक बदलेंगे राशि, जानें किन राशि वालों की होगी चांदी ही चांदीससुराल को स्वर्ग बनाकर रखती हैं इन 3 नाम वाली लड़कियां, मां लक्ष्मी का मानी जाती हैं रूपबंद हो गए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के, लोग परेशान, अब क्या करें'दिलजले' के लिए अजय देवगन नहीं ये थे पहली पसंद, एक्टर ने दाढ़ी कटवाने की शर्त पर छोड़ी थी फिल्ममेष से मीन तक ये 4 राशियां होती हैं सबसे भाग्यशाली, जानें इनके बारे में खास बातेंरत्न ज्योतिष: इस लग्न या राशि के लोगों के लिए वरदान साबित होता है मोती रत्न, चमक उठती है किस्मत

बड़ी खबरें

ताजमहल के बंद 22 कमरों का खुल गया सीक्रेट, ASI ने फोटो जारी करते हुए बताई गंभीर बातेंकर्नाटक: हथियारों के साथ बजरंग दल कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग कैम्प की फोटोज वायरल, कांग्रेस ने उठाए सवालPM Modi Nepal Visit : नेपाल के बिना हमारे राम भी अधूरे हैं, नेपाल दौरे पर बोले पीएम मोदीमहबूबा मुफ्ती ने कहा इनको मस्जिद में ही मिलता है भगवानइलाहाबाद हाईकोर्ट: ज्ञानवापी में मिला बड़ा शिवलिंग, कोर्ट के आदेश पर स्थान सरंक्षित, 20 को होगी अगली सुनवाईIPL 2022 DC vs PBKS Live Updates : 12 ओवर के बाद दिल्ली 4 विकेट के नुकसान पर 107 रनBJP कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के मामले में CBI ने TMC विधायक को किया तलब49 डिग्री के हाई तापमान से दिल्ली बेहाल, अब धूलभरी आंधी के आसार
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.