डेंगू की जांच को लेकर चिकित्सक एकमत नहीं

स्वास्थ्य: एलिजा या एनएस-1

By: Rajendra Vyas

Published: 24 Jul 2018, 01:08 AM IST

बेंगलूरु. इस वर्ष सात जून तक प्रदेश में डेंगू बुखार के 1690 मरीजों की पुष्टि हुई है।1319 मरीजों की एलिसा (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोऑब्जर्बेंट एस्से) और 371 मरीजों की एनएस-1 (नन स्ट्रक्चरल ग्लाइकोप्रोटीन) रैपिड एंटीजेन जांच की गई। लेकिन दोनों जांचों में कौन सी जांच बेहतर है इसे लेकर चिकित्सकों की राय अलग-अलग है। कुछ एनएस-1 को बेहतर तो कई एलिजा को सटीक मानते हैं। कई चिकित्सकों का यह भी मानना है कि परिणामों की सटीकता जांच के समय पर आधारित होती है। हर हाल में एलिजा जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डेंगू की पुष्टि होनी चाहिए।
कौन सी जांच कब होनी चाहिए
विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि डेंगू के लक्षणों के पांच दिन बाद मरीज को चिकित्सक के पास लाया जाए और एनएस1 रैपिड एंटीजेन जांच हो तो रिपोर्ट निगेटिव आने की पूरी संभावना है। मरीज को डेंगू हो तो भी। क्योंकि यह जांच लक्षण सामने आने के पांच दिन के भीतर होनी चाहिए। चिकित्सकों और परिजनों को जानकारी होनी चाहिए कि डेंगू के लिए कौन सी जांच कब होनी चाहिए। नहीं तो खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है।
डब्ल्यूएचओ ने भी माना, एलिजा बेहतर
प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार डेंगू की पुष्टि के लिए एलिसा सबसे बेहतर जांच है। मानक दिशा-निर्देश भी एजिसा जांच को प्राथमिकता देते हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने भी एलिजा प्रस्तावित किया है। क्योंकि एनएस-1 रैपिड एंटीजेन हर मामले में सही नहीं होता। कई बार परिणाम गलत आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अपने कई अध्ययनों के आधार पर एलिजा को ही बेहतर और सटिक माना है।
शुरुआती पांच दिन में एनएस1 जांच
बावजूद इसके डेंगू के ज्यादातर मामलों में कई चिकित्सक एनएस1 एंटीजेन जांच को बेहतर समझते हैं। इनका कहना है कि शुरुआती पांच दिनों में एनएस1 जांच की जाती है जबकि एलिसा के लिए और इंतजार करना पड़ता है। लक्षण सामने आने के पांच दिन बाद एलिसा जांच की जाती है।
एलिजा से प्रामाणिक रूप से पुष्टि
नारायण हेल्थ सिटी के डॉ. महेश कुमार का भी मानना है कि शुरुआती
पांच दिनों में एनएस1 जांच की जाती है। हालांकि, कुछ अन्य चिकित्सकों का मानना है कि एनएस1 जांच के बाद भी एलिसा जांच होनी चाहिए क्योंकि एलिजा में डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक रूप से होती है।
ताकि उपचार में न हो देरी
एम.एस.रामय्या अस्पताल के डॉ. असलम बताते हैं कि जांच कोई भी परिणाम आने तक लक्षणों के आधार पर प्राथमिक उपचार शुरू कर देना चाहिए। नहीं तो मरीज की हालत बिगड़ सकती है। कई बार मरीज लक्षण के बारे में ठीक से नहीं बता पाते हैं। इसलिए हर हाल में एलिसा जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डेंगू की पुष्टि करनी चाहिए।

Rajendra Vyas Editorial Incharge
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