चिकित्सकों ने की तंबाकू उत्पादों पर मुआवजा उप कर बढ़ाने की मांग

- 27 फीसदी कैंसर तंबाकू के कारण
- हर वर्ष 13 लाख लोगों की मौत

By: Nikhil Kumar

Updated: 15 Sep 2021, 07:27 PM IST

बेंगलूरु. वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 45वीं बैठक शुक्रवार को लखनऊ में होगी। स्वास्थ्य व विशेषकर कैंसर रोग विशेषज्ञों ने परिषद से सभी तंबाकू उत्पादों पर मुआवजा उपकर बढ़ाने की मांग की है। उपकर वृद्धि आवश्यक है क्योंकि भारत विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा (268 मिलियन) तंबाकू उपयोगकर्ता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों से हर साल 13 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में लगभग 27 फीसदी कैंसर तंबाकू के कारण होते हैं। वर्ष 2017-18 में तंबाकू के कारण होने वाली सभी बीमारियों और मौतों से होने वाली वार्षिक आर्थिक लागत 1,77,341 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया था। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद का एक फीसदी है।

कंसोर्टियम फॉर टोबैको फ्री कर्नाटक (सीएफटीएफके) ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को पत्र लिख उप कर बढ़ाने के लिए समर्थन मांगा है। कोरोना महामारी के दस्तक देने के बाद परिषद की यह पहली ऑफलाइन बैठक होगी। इसमें उप कर बढ़ोतरी के मुद्दे पर चर्चा की संभावना है।

तंबाकू उत्पादों पर ज्यादा कर इसके इस्तेमाल को रोकने की दिशा में सर्वाधिक प्रभावी नीति है। विशेषकर बच्चों को इन उत्पादों से दूर रखने में मदद मिलेगी। वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण के अनुसार 10 वर्ष की उम्र तक 38 फीसदी लोग सिगरेट, 47 फीसदी लोग बिड़ी और 52 फीसदी लोग धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन कर चुके होते हैं। 13-15 आयु वर्ग के स्कूल के विद्यार्थियों में भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ता व अधिवक्ता डॉ. उपेन्द्र भोजवानी ने बताया कि तंबाकू उत्पादों में बिड़ी सबसे किफायती है। इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी तम्बाकू के सभी उत्पदों पर कर बढ़ाने की सिफारिश की है। संग्रहित कर का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने में किया जा सकता है।

तंबाकू नियंत्रण पर राज्य सरकार की हाई पावर कमिटी के सदस्य व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. यूएस विशाल राव ने बताया कि हर तीसरा व्यक्ति किसी ने किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करता है। इससे गंभीर कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता है। धूम्रपान से फेफड़े की कार्यक्षमता बिगड़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। तंबाकू उपयोगकर्ताओं को कोविड होने पर अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इनमें मृत्यु दर भी ज्यादा है।

GST
Nikhil Kumar Reporting
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