लेटर पैड पर लिखित में देनी होगी दवा, हर मरीज का हो रेकॉर्ड

चिकित्सकों को टेली कंसल्टेशन की सशर्त इजाजत

By: Nikhil Kumar

Published: 27 Mar 2020, 06:33 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना वायरस (Novel Corona Virus) संक्रमण के संदिग्धों व कोविड-19 के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या से निपटने के लिए ज्यादातर सरकारी अस्पतालों ने ओपीडी सेवाएं स्थगित कर रखी हैं। राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (निम्हांस) ने भी बुधवार से आपातकालीन सेवाएं छोड़ अन्य सभी चिकित्सकीय सेवाएं स्थगगित कर दीं। प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त पंकज कुमार पांडे पहले ही लोगों से अपील कर चुके हैं कि जब तक बेहद आवश्यक न हो तब तक लोग अस्पताल आने से बचें।

ऐसे में चिकित्सकों ने टेली कंसल्टेशन (Tele Consultation) सेवा शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को इसकी सशर्त इजाजत दी। जिसके अनुसार चिकित्सकों को अपने लेटर पैड पर लिखित में दवा लिखनी होगी। परामर्श के लिए सोशल मीडिया का इस्तमाल नहीं होगा। हर मरीज को सूचीबद्ध करना अनिवार्य होगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर प्रधान सचिव जावेद अख्तर ने गुरुवार को कहा कि पंजीकृत चिकित्सक अगले तीन सप्ताह तक फोन पर हर अपने मरीजों को चिकित्सा परामर्श दे सकेंगे। इससे विशेषकर फॉलो अप मरीजों (पुराने मरीज जिनका इलाज चल रहा है) का उपचार बाधित नहीं होगा।

नियमित चेक अप और मामूली स्वास्थ्य समस्याओं का निदान टेली कंसल्टेशन के जरिए किया जा सकेगा। लेकिन चिकित्सकों को इंजेक्शन लिखने की इजाजत नहीं होगी। कोविड-19 के संदिग्ध मामलों को सरकारी स्वास्थ्य निकायों में रेफर करना होगा।

चिकित्सकों के लिए अनिवार्य होगा कि लेटर हेड पर ही वे दवा या चिकित्सकीय परामर्श लिखें। पीडीएफ फॉर्मेट में मरीज को पर्ची भेजी जाए। वर्ड फॉर्मेट में प्रेस्क्रिप्शन देने पर रोक रहेगी। परामर्श के लिए सोशल मीडिया का इस्तमाल नहीं होगा।पर्ची के उपर साफ-साफ शब्दों में लिखा हो कि मरीज ने फोन पर परामर्श लिया है और इसी आधार पर पर्चा परामर्श दिया गया है। पर्चे पर परामर्श की तारीख व दवा की अवधि का उल्लेख साफ हो।

Nikhil Kumar Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned