सदन में बहुमत, मंत्रिमंडल गठन की दोहरी चुनौती

सदन में बहुमत, मंत्रिमंडल गठन की दोहरी चुनौती

Santosh Kumar Pandey | Updated: 26 Jul 2019, 08:34:03 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • येडियूरप्पा के लिए अग्निपरीक्षा
  • पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक मंत्री पद के दावेदार
  • असंतुष्ट विधायकों के त्यागपत्र पर स्पीकर का फैसला होगा अहम

बेंगलूरु. चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने बीएस येडियूरप्पा के लिए मंत्रिमंडल का गठन पहली अग्निपरीक्षा होगी। मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल में 3४ सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। सदन में बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस व जनता दल-एस के असंतुष्ट विधायकों में से कम से कम 7-8 विधायकों को भाजपा के लिए मंत्री बनाना अनिवार्य होगा।

असंतुष्ट विधायकों में से रमेश जारकीहोली, उमेश कुमटहल्ली तथा एक अन्य विधायक आर. शंकर को स्पीकर केआर रमेश कुमार अयोग्य करार दे चुके हैं। शेष के असंतुष्ट विधायकों के त्यागपत्र लंबित हैं। ऐसे में येडियूरप्पा के सामने सदन में बहुमत साबित करने के साथ-साथ मंत्रिमंडल में भाजपा तथा असंतुष्ट विधायकों को शामिल कर विभिन्न जिले तथा समुदायों का संतुलन बनाने की चुनौती है।

बहुमत साबित करने से पहले स्पीकर असंतुष्ट विधायकों के त्यागपत्र पर क्या फैसला लेंगे, इस पर भी भाजपा की सरकार का भविष्य निर्भर होगा। असंतुष्ट विधायकों को मंत्रिमंडल में प्रमुख विभाग आवंटित किए जाने पर भाजपा में कई वरिष्ठ विधायकों के नाराज होने की संभावना है। ऐसे विधायकों को मनाना येडियूरप्पा के लिए एक अलग मुश्किल होगी। असंतुष्ट विधायकों को अहमियत मिलने पर भाजपा के नेता तथा कार्यकर्ताओं में अभी से बगावत के सुर उभरने लगे हैं।

भाजपा में मंत्री पद के कई दावेदार
भाजपा विधायक दल में 8 से 10 ऐसे विधायक हैं जो 4-5 बार निर्वाचित हुए हैं, जो मंत्री पद के दावेदार होंगे। उसके पश्चात 2 से 3 बार चयनित विधायकों की संख्या 34 है। पहली या दूसरी बार विधायक बनें विधायकों की संख्या 30 है। विधायक दल में पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर को कौन सा स्थान मिलेगा, इस बात को लेकर उत्सुकता है। विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए केजी बोपय्या, जगदीश शेट्टर, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी तथा एस. सुरेशकुमार का नाम लिया जा रहा है। इनमें से जगदीश शेट्टर तथा केजी बोपय्या ने विधानसभा अध्यक्ष बनने से इनकार किया है। ऐसे में इस पद का दायित्व विश्वेश्वर हेगड़े या एस. सुरेश कुमार को सौंपे जाने की संभावना है।

इनके अलावा गोविंद कारजोल, सीएम उदासी, उमेश कत्ती, आर. अशोक, केएस ईश्वरप्पा. सीटी रवि, बी. श्रीरामुलु, बसवराज बोम्मई, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, अरविंद लिंबावली जैसे वरिष्ठ विधायक मंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे।
हाल में सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पर बहस के दौरान तार्किक जवाब देने वाले वरिष्ठ विधायक जेसी मधुस्वामी भी मंत्री पद के दावेदार हैं। पूर्व मंत्री मुरगेश निराणी, रेणुकाचार्य के साथ ही यलहंका के विधायक एसआर विश्वनाथ, मल्लेश्वरम के विधायक अश्वथनारायण, सुनील कुमार मंत्री पद के दावेदार हैं। इसके अलावा मंत्रिमंडल में लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा, पिछड़े, दलित समुदायों के साथ ही हर जिले को प्रतिनिधित्व देना होगा।

उप मुख्यमंत्री पद के लिए भी आर. अशोक, श्रीरामुलु, गोविंद कारजोल, केएस ईश्वरप्पा समेत कई दावेदार हैं। बताया जा रहा है कि एक से अधिक उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव को भाजपा आलाकमान की सहमति नहीं मिल रही है। मंत्रिमंडल के निर्धारित पदों में असंतुष्ट विधायक, भाजपा के वरिष्ठ विधायक, विभिन्न जिले तथा समुदाय के विधायक तथा विधान परिषद के सदस्य तथा महिला विधायकों को शामिल करना येडियूरप्पा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

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