'हिन्दी के विकास के लिए अनवरत प्रयास हों'

'हिन्दी के विकास के लिए अनवरत प्रयास हों'

Rajendra Shekhar Vyas | Publish: May, 19 2019 05:10:08 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

हिन्दी साहित्य में विविध विषयों पर संगोष्ठी
पत्रवाचन में इंदिरा व कामेश्वरी संयुक्त विजेता

 

बेंगलूरु. यलहंका न्यू टाउन स्थित शेषाद्रीपुरम फस्र्ट ग्रेड महाविद्यालय के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के तहत शनिवार को हिन्दी विभाग की ओर से पत्रवाचन कार्यशाला एवं स्पद्र्धा हुई। इसमेंं विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविदों ने हिन्दी साहित्य में महिलाएं, यात्रा वृत्तांत, किसान का जीवन, वैज्ञानिक प्रगति, हिन्दी सिनेमा के सौ साल आदि विषयों पर पत्रवाचन किया। संगोष्ठी में दस शिक्षाविदों ने विचार व्यक्त किए और प्रोजेक्टर के जरिए जानकारी दी। पेे्रसीडेन्सी महाविद्यालय की हिन्दी प्राध्यापिका डॉ. इन्दिरा वी. और आन्ध्रप्रदेश की डॉ. सी. कामेश्वरी संयुक्त विजेता रहीं। इस सत्र मुख्य अतिथि राजस्थान पत्रिका बेंगलूरु के स्थानीय सम्पादक राजेन्द्रशेखर व्यास थे। उन्होंने कहा कि हिन्दी आज विश्व के कई देशों में बोली और समझाी जाती है। अहिन्दी भाषी क्षेत्र में ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। ऐसे अनवरत प्रयास से हिन्दी के विकास को बल मिलेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
ट्रांसेंड डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उमा शर्मा, सिलीकॉन सिटी कॉलेज की डॉ. वी. तारा नायर ने 'हिन्दी साहित्य में किसान का जीवन' विषय पर महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के साहित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा अन्नदाता पहले भी गरीब था और आज भी गरीब है। इसी कारण दो दशक में देश में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर चुके हैं। जब तक किसान का जीवन स्तर ऊंचा नहीं होगा हम विकसित देश की श्रेणी मेंं नहीं आ सकते। भगवान महावीर जैन कॉलेज की प्रो. रेखा पी. मेनन ने 'महान संगीतकार नौशादÓ विषय पर प्रोजेक्टर के माध्यम से नौशाद के जीवन पर प्रकाश डाला। रेवा विश्वविद्यालय की डॉ. माया ने हिन्दी साहित्य में गीतकार, गायक और गायिकाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रेसीडेन्सी कॉलेज की डॉ. इन्दिरा वी ने हिन्दी साहित्य में आधुनिक महिला विषय पर कहा कि आज की महिला अपने अधिकारों के प्रति सजग है और सेना, पुलिस सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है। अल-अमीन कॉलेज की प्रो. सविता राय, शेषाद्रीपुरम कॉलेज की प्रो. डॉ. मंगलगी सुरेखा ने हिन्दी साहित्य और यात्रा वर्णन पर देश में प्रचलित अनेक भाषा साहित्य पर चर्चा की। शेषाद्रीपुरम कॉलेज की डॉ. उर्मिला पोरवाल ने हिन्दी साहित्य के पुरोधा राहुल सांकृत्यायन तो आन्ध्रप्रदेश की डॉ. सी. कामेश्वरी ने तापस चटर्जी की रचनाओं पर विचार व्यक्त किए। अंत में डीआरडीओ के एलआरडीई डॉ. रंजीत कुमार ने हिन्दी साहित्य में विज्ञान का योगदान विषय पर पत्रवाचन किया। संचालन सुप्रिया ने किया। धन्यवाद हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शर्मिला बिस्वास ने दिया। सहयोग शिवम, त्रिशा व परि ने किया।
इससे पूर्व सुबह संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि इसरो के वैज्ञानिक सचिव डॉ. पी.जी. दिवाकर थे। समारोह में शेषाद्रिपुरम एजुकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष एनआर पंडितराध्या, मानद महासचिव डॉ. वूडी पी. कृष्णा, ट्रस्टी वीडी अशोक, डॉ. एम मुनिराजू, डॉ. आर सर्वमंगला भी अतिथि के रूप में मौजूद थे। प्राचार्य एवं कान्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. एस.एन. वैंकटेश ने सभी का स्वागत किया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर संगोष्ठी की शुरुआत की।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned