पर्यावरण सुरक्षा हर धर्म का मूल : रई

पर्यावरण सुरक्षा हर धर्म का मूल : रई
bangalore news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 03 2016 11:37:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण सभी धर्मो का मूल है। धर्म ग्रंथों में जीवों और पेड़-पौधों की पूजा के पीछे ऋषियों-महर्षियों की एक वैज्ञानिक सोच थी

बेंगलूरु. पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण सभी धर्मो का मूल है। धर्म ग्रंथों में जीवों और पेड़-पौधों की पूजा के पीछे ऋषियों-महर्षियों की एक वैज्ञानिक सोच थी। वे जानते थे कि पेड़-पौधों और जीवों की पूजा करने से उनकी हमेशा रक्षा होती रहेगी जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा और मानवता पर कभी संकट नहीं आएगा।

यह बात राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री रमानाथ रई ने वन्य जीव सप्ताह के अवसर पर लालबाग में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए भारत भी प्रतिबद्ध और हॉल में ही पेरिस में हुए विश्व जलवायु सम्मेलन के समझौते को लागू करने के लिए भारत की तरफ से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए गांधी जी के सिद्धानों को याद करते हुए कहा कि गांधी जी हमेशा ही पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता पर जोर देते थे। वे मानव जाति को हमेशा प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देते रहते थे।

हाथी गलियारे के लिए 300 करोड़ की जरूरत
रमानाथ रई ने कहा कि वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए पिछले एक साल में कर्नाटक वन विभाग ने 100 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की है। भारतीय वन्यजीव शोध संस्थान देहरादून द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में देश में सबसे अधिक 280 वर्ग किलोमीटर वन्य क्षेत्र की वृद्धि कर्नाटक में दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाथियों के संरक्षण तथा हाथियों से नागारिकों की सुरक्षा के लिए हासन जिले में हाथी कॉरिडोर बनाने की योजना पर सरकार काम कर रही है और इसके निर्माण पर लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

शिकार रोकने के लिए उठाए महत्वूर्ण कदम
प्रधान वन्यजीव प्रतिपालक बी.जे. होसमत ने कहा कि प्रक्षियों, जंगली जानवरों, पेड़ पौधों की विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में कर्नाटक वन विभाग की तरफ से कई महत्वूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। पक्षियों व जानवरों के अवैध शिकार को रोकने के लिए विभाग की तरफ से वन्य जीव प्रतिपालकों की नियुक्तियां भी की गई हैं। सरकार के इस कदम से प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण में काफी फायदा हुआ है।

अब 12 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
होसमत ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक साल में 8 करोड़ पौधे लगाए गए और अगले साल 12 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। सूखे के कारण पौधा रोपण पर बूरा असर पड़ रहा और बारिश नहीं होने के कारण नर्सरी में पौधों का अच्छे से विकास नहीं हो पा रहा है साथ ही पौधों को लगाने पर सूखे के कारण वे सूख जा रह हैं।

पर्यावरण से ही मानव का अस्तित्व
अभिनेता विजय राघवेंद्र और उसके भाई अभिनेता मुरली राघवेंद्र ने नागरिकों से पर्यावरण सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और सरकार का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु में पहले मौसम काफी अच्छा होता था लेकिन प्रदूषण के कारण पिछले कुछ साल से शहर के तापमान में जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शहरवासियों को पर्यावरण सुरक्षा के लिए आगे आना होगा।

कलाकारों ने की अपील
वन्य जीवों एवं पंक्षियों के संरक्षण का संदेश देने के लिए मेंगलूरु से वन विभाग के कर्मचारियों एवं 15 बाहरी कलाकारों को बुलाया गया था।

उन्होंने अपने शरीर पर शेर, बाघ, चीता, भालू, बंदर जैसे वन्य जीवों की पेंटिंग की। कब्बन पार्क में रविवार को बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वाद्ययंत्रों की आवाज सुनते ही उनका हूजूम उमड़ पड़ा और कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ लग गई। करीब दो घंटे के कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के अलावा, वन विभाग के  100 से अधिक निरीक्षक व अधिकारी, स्कूली छात्र, स्वयंसेवी संस्थानों के सदस्यों सहित अन्य लोगों ने हिस्सा।
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