ऑनलाइन कक्षा को लेकर विशेषज्ञ समिति ने कर्नाटक सरकार को सौंपी रिपोर्ट

स्कूलों को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि तकनीक के अभाव के कारण एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो।

By: Nikhil Kumar

Published: 07 Jul 2020, 11:32 PM IST

-कक्षा दो तक के विद्यार्थियों के लिए अभिभावकों की निगरानी अनिवार्य
- कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए प्रति सत्र अधिकतम स्क्रीन समय 30 मिनट निर्धारित
- अन्य कक्षाओं के लिए अतिरिक्त 15 मिनट की अनुमति
- कक्षा दो तक के लिए एक दिन छोड़ कर आयोजित हो कक्षाएं
- कक्षा तीन और ऊपर के लिए सप्ताह में पांच दिन कक्षा के आयोजन का सुझाव

बेंगलूरु.

प्रदेश के स्कूलों में ऑनलाइन कक्षा के आयोजन की समीक्षा के लिए प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष समिति ने मंगलवार को सरकार को अपनी रिपोर्ट (The expert committee formed by the Karnataka government to look into modalities of online classes submitted its report) सौंपी। रिपोर्ट में माता-पिता के पर्यवेक्षण को अनिवार्य किया गया है। अधिकतम स्क्रीन समय (Screen Time) और सप्ताह में कक्षाओं की संख्या भी निर्धारित की गई है। समिति ने लाइव और प्री-रिकॉर्डेड कक्षा की इजाजत दी लेकिन साथ ही कुछ दिशा-निर्देश भी दिए हैं।

'कर्नाटक की स्कूली शिक्षा में निरंतरता' शीर्षक रिपोर्ट के अनुसार कक्षा दो तक के विद्यार्थियों के लिए अभिभावकों की निगरानी अनिवार्य होगी। कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए प्रति सत्र अधिकतम स्क्रीन समय 30 मिनट निर्धारित की गई है जबकि अन्य कक्षाओं के लिए अतिरिक्त 15 मिनट की अनुमति देने की बात कही गई है। कक्षा दो तक के लिए एक दिन छोड़ कर कक्षाएं आयोजित होंगी। कक्षा तीन और ऊपर के बच्चों के लिए सप्ताह में पांच दिन कक्षाएं आयोजित हो सकती हैं लेकिन दो दिन गैर-स्क्रीन समय होना चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पर्याप्त साइबर सुरक्षा (cyber security) के साथ लाइव सत्रों की रिकॉर्डिंग सुलभ होनी चाहिए। स्कूलों को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि तकनीक के अभाव के कारण एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो। ऐसा होने की स्थिति में स्कूल की जिम्मेदारी होगी कि अन्य माध्यमों से प्रमुख शिक्षण मॉड्यूल बच्चे तक पहुंचे।

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि शिक्षा विभाग अपने टेलीविजन और रेडियो (Television and Radio) प्रसारण फिर से शुरू करे और वर्तमान समय के अनुरूप सार्थक शिक्षण व पाठ्य सामग्री को बढ़ावा दे। स्कूल पारदर्शी हों, अपनी योजनाएं और मॉड्यूल सार्वजनिक करें और शिक्षाविदों को समीक्षा का अवसर दें।

दिशा-निर्देशों के उल्लंघन व अभिभावकों की शिकायत पर शिक्षा विभाग को संबंधित स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी। बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए नवाचार मॉड्यूल तैयार हों और इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाए कि हर बच्चा एक समान नहीं होता है। शिक्षा विभाग के अनुसार समिति के प्रस्तावों पर सरकार विचार करेगी और जल्द ही सरकारी आदेश जारी करेगी।

उल्लेखनीय है कि अभिभावकों के विरोध और राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (The National Institute of Mental Health and Neuro-Sciences ) के निदेशक डॉ. बी. एन. गंगाधार के रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग ने कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा पर रोक लगा दी थी। बाद में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मानकों के अनुसार शिक्षा विभाग ने अस्थाई रूप से कक्षा के आयोजन की इजाजत दी थी।

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Nikhil Kumar Reporting
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