scriptfibroids in Uterus, surgery, lump, Guinness Book of World Records | गर्भाशय का ऑपरेशन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज | Patrika News

गर्भाशय का ऑपरेशन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

  • चिकित्सकों ने गर्भाशय से निकाले थे 236 फाइब्रॉएड
  • फाइब्रॉएड के कारण गर्भाशय में विकृति आ गई थी। ऑपरेशन कर सभी फाइब्रॉएड निकाले गए, जिसका कुल वजन सवा दो किलो था। सर्जरी करीब पांच घंटे चली।

बैंगलोर

Published: April 23, 2022 07:12:56 pm

बेंगलूरु. शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने गत वर्ष नवंबर में एक 34 वर्षीय महिला के गर्भाशय का ऑपरेशन कर विभिन्न आकार के 200 से ज्यादा फाइब्रॉएड निकाले थे। इस दौरान गर्भाशय को भी बचा लिया गया। अब इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दर्ज किया है। कोरोना महामारी के कारण सर्जरी में करीब एक वर्ष की देरी हुई।

गर्भाशय का ऑपरेशन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज
गर्भाशय का ऑपरेशन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

चिकित्सकों के अनुसार मरीज रितिका (परिवर्तित नाम) को पेट के निचले में दर्द, सूजन व असामान्य गर्भाशय रक्तस्राव की शिकायत थी। गर्भाशय के जांच में गांठ का पता चला। एमआरआइ में फूलगोभी के आकार के एक सहित 236 फाइब्रॉएड की पुष्टि हुई।

सकरा अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांताला थुप्पन्ना ने बताया कि फाइब्रॉएड के कारण गर्भाशय में विकृति आ गई थी। पेट में उभार के कारण वह करीब आठ माह की गर्भवती दिख रही थी। ऑपरेशन कर सभी फाइब्रॉएड निकाले गए, जिसका कुल वजन सवा दो किलो था। सर्जरी करीब पांच घंटे चली। ज्यादातर फाइब्रॉएड उसके गर्भाशय के बाईं ओर फैले हुए थे। पेट के महत्वपूर्ण हिस्सों के काफी सटे होनेे के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। गर्भाशय को भी बचाना था। अनुमान के अनुसार ये फाइब्रॉएड्स करीब दो वर्ष पहले बनने शुरू हुए थे। समय के साथ संख्या और आकार में बढ़ एक दूसरे से चिपक गए थे।

डॉ. शांताला ने बताया कि यूटेराइन फाइब्रॉएड कैंसरयुक्त नहीं होते हैं। ये मांसपेशियों और रेशेदार ऊतक से बने होते हैं। पेट के निचले हिस्से में दर्द, असामान्य मासिक धर्म चक्र, ज्यादा रक्तस्राव, कभी- कभी गर्भपात, समय से पहले प्रसव, पेट में उभार व कब्ज आदि इसके लक्षण हो सकते हैं। कभी-कभी फाइब्रॉएड अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। ज्यादातर मामलों में समय से उपचार नहीं होने के कारण ये आकार और संख्या में बढ़ जाते हैं। एनीमिया और बांझपन सहित अन्य समस्याओं का कारण बनते हैं।

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