अभी भी 50 फीसदी वाहनों को फास्टटैग का इंतजार

राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचडीए) के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित टोलगेट से गुजरनेवाले वाहनों के लिए फास्टटैग लगाना अनिवार्य है। 15 जनवरी फास्टटैग लगाने के लिए अंतिम दिनांक है लेकिन अभी तक राज्य के 50 फीसदी वाहनों को फास्टटैग का इंतजार है।

बेंगलूरु.राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचडीए) के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित टोलगेट से गुजरनेवाले वाहनों के लिए फास्टटैग लगाना अनिवार्य है। 15 जनवरी फास्टटैग लगाने के लिए अंतिम दिनांक है लेकिन अभी तक राज्य के 50 फीसदी वाहनों को फास्टटैग का इंतजार है।
फास्टटैग नहीं मिलने के कारण से राज्य के विभिन्न टोलगेट पर टोलटैक्स का नगर रूप में भुगतान करनेवाले वाहनों की संख्या बढ़ रही है। टोल संग्रहण के लिए फास्टटैग वाले वाहनों के लिए अलग गेट बनाया गया है। हालांकी ऐसे गेट से गुजरनेवाले वाहनों की संख्या नगण्य है।इसका प्रमुख कारण मांग के अनुपात में फास्टटैग का लेबल उपलब्ध नहीं होना है। बताया जा रहा है कि राज्य के 50 फीसदी वाहन बगैर फास्टटैग ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवाजाही कर रहें है।
टोलगेट पर शुल्क वसूलने का कार्य तेजी से हो तथा इसके परिणाम स्वरुप टोल शुल्क के भुगतान के लिए वाहनों चालकों को लंबे समय तक कतारों में लगे रहने की नौबत ना आए इसलिए एनएचडीए ने वाहनों पर फास्टटैग लेबल लगाने की योजना लागू की है।वाहन चालकों को भी यह योजना अच्छी ल रही है। लेकिन प्राधिकरण मांग के अनुपात में फास्टटैग उपलब्ध कराने में विफल रहा है। इसलिए वाहन चालक हमेशा की तरह टोलगेट पर लंबी कतारों में शामिल होकर नकदी से इस शुल्क का भुगतान करने के लिए मजबूर है।
टोलगेट पर ऐसे वाहनों के लिए अलग कतारे भी आरक्षित है। इन्हीं कतारों पर वाहनों की संख्या अधिक है।बेंगलूरु शहर के बाहरी क्षेत्र नेलमंगला, देवनहल्ली, अत्तिबेले, इलेक्टा्रनिक सिटी,होसकोटे तथा नाइस सड़क के सभी टोलगेट पर लगभग यही नजारा देखने को मिल रहा है। फास्टटैग की व्यवस्था अनिवार्य करने से पहले प्राधिकरण को पर्याप्त संख्या में फास्टटैग की आपूर्ति पर ध्यान देना था लेकिन ऐसा नहीं किए जाने से मौजूदा हालांत पैदा हुए है। ऐसे में अद देखना होगी की 15 जनवरी की समयसीमा पूरी होने के पश्चात विभिन्न टोलगेट पर कैसे हालांत पैदा होते है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के सूत्रों के मुताबिक अन्य जिले तथा अन्य राज्यों के वाहन चालकों ने फास्टटैग प्राप्त करने में जो सतर्कता दिखाई ऐसी सतर्कता शहर के वाहन चालकों ने नहीं दिखाई शहर के अधिकतर वाहन चालकों ने अभी तक फास्टटैग के लिए आवेदन तक नहीं दिया है। फास्टटैग की व्यवस्था आनन-फानन में लागू नहीं की गई है।यह योजना गत दो वर्षों से लागू है अबकि बार केवल इस व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। टोलगेट पर नकद कारोबार को रोकने के लिए यह पारदर्शी व्यवस्था जारी की गई है। इससे वाहन चालकों का काफी समय बचता है।
उल्लेखनीय है कि किसी मोबाइल दूरभाष की प्री पेड व्यवस्था की तर्ज पर फास्टटैग विकसित किया है। इससे वाहन चालक एक निर्धारित शुल्क का भुगतान कर वाहन के लिए क्यूआर कोड युक्त फास्टटैग का लेबल प्राप्त करते है। इस लेबल को वाहन के शीसे पर लगाया जाता है। जैसा ही यह वाहन टोलगेट पर पहुंचता है तब वहां पर लगे इलेक्ट्रानिक सेंसर इस लेबल को पढ़ लेते है तथा चंद क्षणों में शुल्क का ऑनलाइन पर ही भुगतान हो जा ता है।उपभोक्ता इसे फिर रिचार्ज कर सकते है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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