उत्तम कोटि की सहिष्णुता अपनाएं : आचार्य देवेंद्रसागर

  • जयनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 02 May 2021, 04:46 PM IST

बेंगलूरु. जयनगर के धर्मनाथ जैन संघ में विराजित आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि असहिष्णुता से मुक्त होने के लिए सहिष्णुता धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहिष्णुता तीन प्रकार की होती है- पहला उत्तम सहिष्णुता, दूसरा मध्यम सहिष्णुता एवं तीसरा सामान्य सहिष्णुता। उत्तम सहिष्णुता संतों में, मध्यम सहिष्णुता सज्जनों में और सामान्य सहिष्णुता समझदारों में पाई जाती है।

उन्होंने कहा कि उत्तम सहिष्णुता संतों में इसलिए पाई जाती है क्योंकि संत कभी भी अपकारी का प्रतिकार नहीं करते। हर कोई व्यक्ति अपकारी के अपकार को सह नहीं पाता। अपकारी को उपकारी मानना यह संतों का स्वभाव है और उत्तम सहिष्णुता का रूप है। अपकारी को अपकारी मानना सामान्य सहिष्णुता है।

हमने किसी का अपकार किया है, तभी हमारे साथ अपकार हो रहा है यह मानना तथा मेरे साथ अपकार हुआ है, मैं किसके साथ अपकार करूं, यह मध्यम सहिष्णुता का भाव है और यह सज्जन व्यक्ति ही सोचते हैं।

आचार्य ने कहा कि जीवन में बड़प्पन लाना है तो उत्तम कोटि की सहिष्णुता अपनाएं और यह नहीं हो सकता तो कम से कम हम मध्यम सहिष्णुता को तो अपना ही सकते हैं। सहिष्णुता यानी सहनशीलता।

Santosh kumar Pandey Desk
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