गत वर्ष की तुलना में चार गुना बढ़े डेंगू मरीज

गत वर्ष की तुलना में चार गुना बढ़े डेंगू मरीज
गत वर्ष की तुलना में चार गुना बढ़े डेंगू मरीज

Nikhil Kumar | Updated: 11 Sep 2019, 04:35:16 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

ऐसा एक भी जिला नहीं है, जहां Dengue ने लोगों को अपना शिकार न बनाया हो। बारिश में यह Mosquito तेजी से पनपते हैं। साथ ही तापमान का बार-बार कम-ज्यादा होना और तेजी से बढ़ता शहरीकरण भी डेंगू के फैलने के लिए जिम्मेदार है। कुछ मामलों में तो Fever के बिना भी डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू के मच्छर Stomach, Kidney, Liver और Pancrease पर हमला कर रहे हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक (Gastrointestinal Track) में Water जमने और दस्त के कारण मरीजों को कई दिनों तक भर्ती रखना पड़ रहा है।

- 10 हजार से ज्यादा मरीज

- 6515 मरीज बेंगलूरु से

बेंगलूरु. प्रदेश में इस वर्ष डेंगू के मरीजों की संख्या 10524 पहुंच गई है। इनमें से 6515 मरीज बेंगलूरु से हैं। गत वर्ष के सात सितम्बर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2456 मरीज ही थे। 313 मरीज Bengaluru से थे। यानी इस वर्ष मरीजों की संख्या चार गुना बढ़ी है। गत वर्ष इस अवधि में दक्षिण कन्नड़ जिले में 472 मरीजों की पुष्टि हुई थी। इस वर्ष जनवरी से लेकर सोमवार तक इस जिले में 948 मरीज मिले हैं। Dakshin Kannada के बाद 384 मरीजों के साथ शिवमोग्गा सर्वाधिक प्रभावित है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार ऐसा एक भी जिला नहीं है, जहां डेंगू ने लोगों को अपना शिकार न बनाया हो। बारिश में यह मच्छर तेजी से पनपते हैं। साथ ही तापमान का बार-बार कम-ज्यादा होना और तेजी से बढ़ता Urbanization भी डेंगू के फैलने के लिए जिम्मेदार है।

Doctors का कहना है कि गत वर्ष तक त्वचा पर लाल चकते और बुखार डेंगू को परिभाषित करते थे। वैसे तो 95 प्रतिशत मामलों में डेंगू सामान्य बुखार की दवाई और सामान्य देखभाल से ही ठीक हो जाता है। पांच प्रतिशत केस ही ऐसे होते हैं, जिसमें स्थिति गंभीर होती है। यह ऐसे मामले होते हैं, जब डेंगू दूसरी या तीसरी बार अटैक करता है। इसमें Blood Cells बनना कम हो जाते हैं। किडनी काम न करने जैसी कई समस्याएं होती हैं।

लेकिन इस वर्ष स्थिति बदल गई है। कुछ मामलों में तो बुखार के बिना भी डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू के मच्छर पेट, गुर्दा, यकृत और अग्न्याशय पर हमला कर रहे हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक में पानी जमने और दस्त के कारण मरीजों को कई दिनों तक भर्ती रखना पड़ रहा है। लोगों का सलाह है कि तीन से ज्यादा दिनों तक तेज बुखार रहने की स्थिति को नजरअंदाज करने या घरेलू उपचार करते रहने से बेहतर है कि एक बार अपने चिकित्सक को जरूर दिखाएं।

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