दोस्ती में फुलस्टाप नहीं आना चाहिए-डॉ. पद्मकीर्ति

धर्म चर्चा

By: Yogesh Sharma

Published: 01 Aug 2020, 04:12 PM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम के दिवाकर गुरु मिश्री दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा का चातुर्मास निरंतर जारी है। शनिवार को दैनिक धर्मचर्चा में दोस्त की व्याख्या करते हुए साध्वी डॉ. पदमकीर्ति ने कहा कि सच्चा दोस्त वही होता है जो अपने दिल की बात एक दूसरे को कहे। दिल की बात छिपाए नहीं। दिल की बात कहने से दूरियांं नजदीकियों में बदल जाती हैं। जितनी-जितनी निकटता बढ़ती है उतनी-उतनी दोस्ती गहरी होती है। दोस्ती में दोस्त कोई भी बात पूछे तो बिना ना नुकुर बता देना चाहिए। दोस्ती क्रॉस वेंटिलेशन जैसी हो जब चाहे तब दिल में झांक कर देखा जा सके। क्योंकि क्रॉस वेंटीलेशन पर दरवाजा नहीं होता है। दोस्ती द्वार जैसी नहीं होनी चाहिए कि कभी द्वार खोल दिया तो कभी बंद कर दिया। दोस्ती में एक दूसरे के मानने लायक सुझाव माने जाएं। जब भी कभी कोई प्रॉब्लम हो तो अपने दोस्त से कहें, दोस्त सही सुझाव दे तो अवश्य माने। नम्बर शून्य से पहले लगकर स्वयं का भी मूल्य बढ़ाते हैं और शून्य का भी मूल्य स्थापित करते हैं। ऐसे भी कई व्यक्ति संसार में है जो दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा से भी अधिक महत्व देते हैं। दूसरों का दुख उन्हें काटे की तरह दर्द पैदा करता रहता है। दूसरों के पीछे वो अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। दोस्तों को कांच की चूड़ी की तरह नाज़ुक न बनाएं की छोटी सी बात में टूट जाएं ,एक दूसरे के प्रति दोस्ती में नकारात्मक विचार भी आ सकते हैं, पर उन विचारों को स्थायित्व न दें। रोड पर ट्रैफिक हो तो प्रॉब्लम नहीं आती है। ट्रैफिक आराम से क्रॉस करके भी आगे बढ़ा जा सकता है। ट्रैफिक जाम हो जाए तो प्रॉब्लम की बात है वैसे ही एक दूसरे के प्रति ऊं ची -नीची बात मन में आ सकती है। वह बात मन की गहराई में जमे नहीं। मन की गहराई में बात जमते ही दोस्ती टूट जाती है। दोस्ती में कहीं-कहीं कोमा आ जाता है, तो चलता है पर फुलस्टाप नहीं आना चाहिए। किसी भी सब्जेक्ट पर दोनों में मतभेद हो सकता है।
उन्होंने कहा कि चाल-ढाल देखकर ही किसी को अपना दोस्त बनाना चाहिए। चाल अर्थात चरित्र। ढाल अर्थात ढलने की कला। ढलना अर्थात सहने की कला। किसी दोस्त का करेक्टर अच्छा है पर ढलने की कला नहीं है उसके पास तो बहुत मुश्किल से ही दोस्ती निभती है क्योंकि सामने वाले सारा एडजस्टमेंन्ट चाहेगा एवं स्वयं एडजस्ट होने से उद्यत नहीं होगा। ऐसे में एक सदा निहाई और दूसरा हथौड़ा बना रहेगा। एक सदा मोम की तरह पिघलता रहेगा दूसरा आग बनकर जलाता रहेगा। ऐसे में हथौड़े को तो फायदा पर बिचारी निहाई कब तक सहती रहेगी।
डॉ. पद्मकीर्ति ने कहा कि विपरीत परिस्थितियां और संकट आ जाने पर कमजोर न बनें। संकट कमजोर मन वाले को तोड़ देता है, बलवान मन वाला संकट के समय रिकॉर्ड तोड़ देता है। घर में कभी पत्नी से, कभी मां से, कभी बेटे से अनबन हो जाए तो दोस्त से सही सलाह लें और अपने जीवन में सुधार करें। अगर स्वयं के जीवन में सुधार नहीं करना चाहते तो समाधि और प्रसन्नता बनी रह सकती। या तो स्वयं के जीवन में परिष्कार करें या दूसरे जैसे भी है उन्हें स्वीकार करें तो ही शान्ति की श्वास ली जा सकती है। दूसरों को बदलने का ख्वाब तो छोड़ देना ही चाहिए। गुरुभक्त वर्षावास समिति के मंत्री उम्मेद रांका ने बताया कि शनिवार को बेंगलूरु से पंडित भानुप्रकाश शर्मा, पदम आच्छा, शिव शर्मा, हेमंत, सुरेन्द्र बोहरा आदि ने साध्वी वृन्द के दर्शन वंदन किया।

Yogesh Sharma Reporting
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