कोरोना के साए में फीका रहा ‘गौरी-गणेश हब्बा’

  • मंदिरों में नहीं लगी लम्बी कतार
  • गली-मोहल्लों में धूम-धड़ाका न हुआ

By: Santosh kumar Pandey

Published: 23 Aug 2020, 06:28 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक में इस बार गणेशोत्सव का रंग अन्य वर्षों की तुलना में फीका रहा। न तो बड़े पंडाल सजे, न ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची। रातभर चलनेवाले कार्यक्रम रतजगा जैसा माहौल बनाते थे लेकिन इस वर्ष ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोरोना के साए के अलावा राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ के कारण भी माहौल बन नहीं पाया।

जैसे- जैसे गणेशोतसव करीब आया राज्य में कोरोना के मामले खतरनाक स्तर पर पहुंच गए, इस वजह से भी लोग सतर्कता बरतने को मजबूर हुए। कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन भी ऐसी थी जिसमें कोरोना से बचाव पर ही सारा जोर दिखाई दिया।

बेंगलूरु के साथ ही मैसूरु, शिवमोग्गा, हासन, हुब्बल्ली-धारवाड़, मेंगलूरु, बेलगावी, विजयपुरा, कोप्पल आदि शहर गणेशोत्सव की धूम के लिए जाने जाते रहे हैं।

नहीं दिखी लम्बी कतार

बेंगलूरु में गौरी-गणेश उत्सव पर कई दिन तक चलनेवाले उत्सव में भक्तिभाव से ओतप्रोत कार्यक्रम लोगों के उल्लास व उत्साह के गवाह बनते रहे हैं लेकिन इस बार शहर के मशहूर दोड्ड गणपति मंदिर पर भी कोरोना का असर रहा।

मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए दिनभर हजारों लोगों की कतार लगती थी लेकिन इस बार कुछ सौ लोग ही दिखाई दिए। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य नीलकंठ के अनुसार इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर श्रध्दालुओं की संख्या अपूर्व रूप से कम रही।

मंदिरों में कम रहे श्रध्दालु
शहर के अन्य मंदिरों में भी गणेश की प्रतिमा की सजावट तो हुई लेकिन श्रध्दालुओं की संख्या कम ही रही। मूर्ति बनाने वाले कई लोगों के लिए भी यह यादगार अनुभव नहीं रहा।

जेपी नगर में मूर्ति बेचने वाले संजू के अनुसार इस बार लोगों ने घरों में स्थापना के लिए छोटी मूर्तियां ही खरीदीं, वह भी कम। फल और फूल बेचनेवाले तमाम दुकानदारों की उम्मीदें भी अधूरी रह गईं।

Santosh kumar Pandey Desk
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