जीआइसैट-1 का प्रक्षेपण टला

प्रक्षेपण से लगभग 26 घंटे पहले तकनीकी खामी सामने आई
नई तारीख की घोषणा जल्द

By: Rajeev Mishra

Published: 05 Mar 2020, 12:01 AM IST

बेंगलूरु.
नवीनतम भू-अवलोकन उपग्रह जीआइसैट-1 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1) का प्रक्षेपण टाल दिया गया है। इस उपग्रह को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से गुरुवार शाम 5.43 बजे प्रक्षेपित किया जाना था। लेकिन, प्रक्षेपण से लगभग 26 घंटे पहले लांच स्थगित कर दिया गया। संभवत: प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू होने के तुरंत बाद प्रक्षेपण स्थगित करने का फैसला किया गया लेकिन, इसरो ने इसकी पुष्टि नहीं की।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बयान जारी कर कहा कि 'जीएसएलवी एफ-10 से 5 मार्च 2020 को लांच होने वाले जियो इमेजिंग सेटेलाइट (जीआइसैट-1) का प्रक्षेपण तकनीकी कारणों से स्थगित कर दिया गया है। लांच की नई तारीख तय होने के बाद उसकी सूचना दी जाएगी।Ó हालांकि, इसरो ने यह जानकारी नहीं दी है कि प्रक्षेपण टालने की नौबत क्यों आई। क्या प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू होने के बाद प्रक्षेपणयान में कोई रिसाव के संकेत मिले या कोई और वजह है।
इस बीच इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक लांच की नई तारीख 12 मार्च से पहले ही घोषित होनी चाहिए अन्यथा फिर लांच विंडो उपलब्ध नहीं रहेगा। अगर उपग्रह का प्रक्षेपण 12 मार्च तक हो जाता है तो ठीक वर्ना लांच विंडो के लिए इंतजार करना होगा। इस भू-अवलोकन उपग्रह को धरती की 36 हजार किमी वाली भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाना है जहां से यह समूचे भारतीय उपमहाद्वीप पर 24 घंटे नजर रखेगा। अमूमन भू-अवलोकन उपग्रहों को धरती निचली कक्षा (लगभग 600 किमी वाली कक्षा) में ही स्थापित किया जाता है लेकिन, यह पहला भू-अवलोकन उपग्रह होगा जिसे धरती की 36 हजार किमी वाली कक्षा में भेजा जाएगा। इस उपग्रह के जरिए देश के किसी भी भू-भाग की तस्वीरें रीयल टाइम में हासिल की जा सकेंगी। ऑपरेशनल होने के बाद इससे देश की सीमाओं की निगरानी भी होगी। इसरो का कहना है कि यह उपग्रह मौसम की भविष्यवाणी और प्राकृतिक आपदा के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है।

Rajeev Mishra Reporting
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