मन को अच्छे विचार दें: आचार्य देवेंद्र सागर

  • जयनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 16 Apr 2021, 04:47 PM IST

बेंगलूरु. धरती में जैसा बीज पड़ेगा, पौधे वैसे ही उगेंगे। उसी प्रकार, मन में जैसे विचार उत्पन्न होते हैं उन्हीं के अनुरूप हमारे जीवन की वास्तविकता का निर्माण होता है। अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए जैसे हम अच्छे बीजों का चुनाव करते और उसके बाद उसे धरती के हवाले करते हैं, उसी प्रकार अच्छे विचारों का चुनाव करके ही उन्हें मन के हवाले करना चाहिए। यह बात आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने जयनगर के राजस्थान जैन मूर्तिपूजक संघ में प्रवचन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि आजकल जिस सकारात्मक सोच को विकसित करने की बात की जाती है वे वास्तव में शुभ संकल्प ही होते हैं। अक्सर कहा जाता है कि पुरुषार्थ से ही कार्य सिद्ध होते हैं, मन की इच्छा से नहीं। बिल्कुल ठीक बात है, लेकिन मनुष्य पुरुषार्थ कब करता है? वास्तविकता तो यह है कि मन की इच्छा के बिना पुरुषार्थ भी असंभव है।

सुख-समृद्धि और आनंद, दोनों ही प्राप्त करने के लिए मन की उचित दशा या सकारात्मक भावधारा का निर्माण करना अनिवार्य है। जिस दिन मन को नियंत्रित कर उसे सकारात्मकता प्रदान करना सीख जाएंगे, पारस पत्थर हाथ में आ जाएगा। मन के कल्पवृक्ष बनते देर नहीं लगेगी।

Santosh kumar Pandey Desk
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