scriptGive the door of the heart a chance to open: Acharya Devendrasagar | हृदय के कपाट को खुलने का अवसर दें: आचार्य देवेंद्रसागर | Patrika News

हृदय के कपाट को खुलने का अवसर दें: आचार्य देवेंद्रसागर

  • महावीर भवन में प्रवचन

बैंगलोर

Published: April 29, 2022 12:20:19 pm

मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ, महावीर भवन में आचार्य देवेंद्रसागर ने प्रवचन में कहा कि आज के युग में इंसान ईर्ष्या, क्रोध, निंदा, चुगली, नफरत और बेईमानी से स्वयं को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की स्पर्धा में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। स्पर्धा ही करनी है तो खुद को जानने की करें, अपनी सांसों में बसी शक्ति को पहचान कर हृदय में विराजमान परमानंद शांति के अनुभव की करें, ताकि मनुष्य जीवन सफल बनाया जा सके। इस सांस की खूबसूरती यह है कि इसमें कोई स्पर्धा नहीं होती। श्रेष्ठ सज्जन वही हैं, जो ज्ञान के प्रति प्रतिबद्ध और मानवता के प्रति समर्पित हैं। इस सांस की कीमत पर ध्यान नहीं दिया जाता, क्योंकि परमशक्ति इसे मुफ्त में देती है और इंसान पैसे को जरूरत से ज्यादा महत्व देता है।
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सांस से ज्यादा महत्वपूर्ण तो भौतिक वस्तुएं हो गई हैं। छल-कपट से कमाई गई संपदा विलासिता का वह आवरण देती है, जिससे व्यक्ति अपनी बाहरी जिंदगी में थोड़ी देर खुश हो सकता है, लेकिन दिल उसका प्यासा ही रहेगा, और यह प्यासा दिल बगैर सांस के धड़क भी नहीं सकता। इसलिए मेहनत और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए धन-दौलत, नाम-प्रतिष्ठा कमाने के लिए चाहे जितनी स्पर्धा करें, मगर सभी को अपनी दिनचर्या से कुछ समय निकालकर शांति के अनुभव की भी स्पर्धा करनी चाहिए। इस अनमोल सांस के भीतर की शक्ति से हृदय को शांत कर मनुष्य जीवन सफल बनाना ही सच्चे ज्ञान की सार्थकता है।
दुनिया में आदमी को और कोई इतना परेशान नहीं करता, जितना उसकी स्वयं की कमजोरी, गलत आदतें, व्यसन या दुर्गुण परेशान करते हैं। इस दुनिया का बहुत मुश्किल कार्य अगर कोई है तो वह है खुद की कमजोरियों को पहचान लेना। आत्मनिरीक्षण बड़ा कठिन है। स्वयं के दोषों को दूर करने का काम कोई साहसी ही कर सकता है। जीवन को सफलता और आनंद की ओर ले जाना है तो अपनी कमजोरियों की लिस्ट बनाएं और आज से ही उन्हें दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हो जाएं। हृदय के कपाट को खुलने का अवसर दें, अंदर भी जाने का प्रयास करें। अंदर मौजूद अविनाशी परमात्मा का अनुभव करने के लिए चाहिए ‘ज्ञान। वह ज्ञान जिसे आत्मज्ञान कहा जाता है। जब एक बार ध्यान आपके अंदर की ओर जाने लगता है, जब व्यक्ति खुद को पहचान जाता है तो बाहर की सारी परिस्थितियों से अलग एक सुंदर, सुखद और आनंदमय स्थिति का अनुभव होता है।

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