विपक्ष का काम सुनाना, सरकार का काम सुनना

कांग्रेस को विपक्ष में बैठने की आदत नहीं है तो भाजपा को सत्तासीन दल बनने की आदत नहीं है। इसलिए कई समस्याएं पैदा हो रही है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सुनाना होता है तो सरकार का काम सुनने का है। लेकिन, सत्तासीन भाजपा विपक्ष की आवाज सुनने के लिए ही तैयार नहीं है। भाजपा के सदस्य सत्ता में होने के बावजूद आज भी सदन में विपक्ष की तरह ही बर्ताव कर रहें है।

By: Sanjay Kulkarni

Published: 18 Feb 2020, 09:14 PM IST

बेंगलूरु.कांग्रेस को विपक्ष में बैठने की आदत नहीं है तो भाजपा को सत्तासीन दल बनने की आदत नहीं है। इसलिए कई समस्याएं पैदा हो रही हंै। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सुनाना होता है तो सरकार का काम सुनने का है। लेकिन, सत्तासीन भाजपा विपक्ष की आवाज सुनने के लिए ही तैयार नहीं है। भाजपा के सदस्य सत्ता में होने के बावजूद आज भी सदन में विपक्ष की तरह ही बर्ताव कर रहें है। कांग्रेस के सदस्य सीएम इब्राहिम की इस व्यंगात्मक टिप्पणी पर सदन में खूब ठहाके लगे।
राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उन्होंने कहा कि राज्यपाल का भाषण केवल सुनने में अच्छा लगता है। इस भाषण के माध्यम से राज्य की जनता को केवल सब्जबाग दिखााया गया है। उनके भाषण में उल्लेखित योजनाएं कब लागू होंगी इस बात का सत्तासीन भाजपा के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। राज्यपाल का भाषण महज एक हवामहल होने के कारण वे उस पर टिप्पणी भी नहीं करना चाहते है। हालांकि वे सत्तासीन भाजपा को मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने से भी नहीं रोक सकते है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य की वित्तीय स्थिति की सटीक जानकारी देने के लिए श्वेतपत्र जारी करना चाहिए। राज्य में भाजपा के पास 26 सांसद होने के बावजूद केंद्र सरकार कर्नाटक के साथ न्याय नहीं कर रही है। देश में आयकर जीएसटी के माध्यम से सबसे अधिक राजस्व देनेवाले कर्नाटक को विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त सहायता क्यों नहीं मिल रही है? जीएसटी की करोड़ों रुपए बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है? राज्य के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के साथ संघर्ष में कांग्रेस भी भाजपा का साथ देने के लिए तैयार है। बजट में केंद्र सरकार ने राज्य को क्या दिया है? रेलवे बजट ेंराज्य को क्या मिला है। 18 हजार करोड़ रुपए की बेंगलूरु उपनगरीय रेल सेवा के लिए महज 1 करोड़ रुपए का आवंटन क्या आंखमिचोली नहीं है? कोलार में प्रस्तावित रेल कोच कारखाने को क्यों स्थानांतरित किया गया?
उन्होंने राज्य सरकार के प्राकृतिक आपादा वाले क्षेत्रों में तीन लाख नए मकान बनाए जाने के दावे पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि वास्तविकता यह है कि कई क्षेत्रों में अभी तक सर्वेक्षण कार्य तक पूरा नहीं हु्आ है। ऐसे में 3 लाख मकान बनाए जाने का राज्य सरकार का दावा खोखला है। अगर सरकार में हिम्मत है तो इस दावे की पुष्टि के लिए सदन समिति का गठन करे।

Sanjay Kulkarni Reporting
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