विधेयक तैयार करने में जुटी सरकार, दूसरे राज्यों के दौरे पर मंत्री-अधिकारी

विधानमंडल का शीतकालीन अधिवेशन ७ से

By: Sanjay Kulkarni

Updated: 05 Dec 2020, 05:28 AM IST

बेंगलूरु. विधानमंडल के सोमवार से शुरु हो रहे शीतकालीन अधिवेशन में सरकार गोहत्या प्रतिबंध और शादी के लिए धर्मांतरण (लव जिहाद) प्रतिबंध विधेयक पेश करने की घोषणा कर चुकी है। हालांकि, अभी दोनों विधेयकों का मसौदा तैयार करने का ही काम चल रहा है। दोनों विधेयकों को तैयार करने के लिए अधिकारी दूसरे राज्यों में लागू किए गए कानून का अध्ययन कर रहे हैं। गोहत्या निषेध विधेयक के बारे में अध्ययन करने के लिए मंत्री और अधिकारियों का दल उत्तर प्रदेश और गुजरात के दौरे पर गया है जबकि लव जिहाद पर प्रस्तावित विधेयक के लिए अधिकारी उत्तर प्रदेश के अध्यादेश का अध्ययन कर रहे हैं।

दोनों प्रस्तावित विधेयकों को लेकर जारी राजनीतिक कोलाहल के बीच इसे शीत सत्र में पेश किए जाने को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मंत्रियों के विरोधाभासी बयान आ रहे हैं। गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार को भी दोहराया कि राज्य मे लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाया जाएगा। हालांकि, मंगलवार को विधि व संसदीय कार्यमंत्री जे सी मधुस्वामी ने कहा था कि अभी इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। अधिकरियों का कहना है कि शीत सत्र में लव जिहाद विधेयक को पेश किए जाने की संभावना कम है। अभी मसौदा तैयार करने का काम चल रहा है, जिसमें संबंधित विभागों के साथ कई कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा होनी है। मसौदा तैयार होने के बाद कई विभागों की समीक्षा से गुजरेगा।

इसके बाद उसे अनुमोदन के लिए मंत्रिमंडल में रखा जाएगा और उसके बाद ही विधेयक किसी सदन में पेश हो सकता है। शीतकालीन सत्र सिर्फ एक सप्ताह का ही है जबकि विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया में वक्त लग सकता है।उडुपी में पत्रकारों से बातचीत में गृह मंत्री बोम्मई ने कहा कि राज्य में लव जिहाद को लेकर कानून बनाया जाएगा और इसे लेकर अधिकारियों को उत्तर प्रदेश में जारी अध्यादेश का अध्ययन करने के लिए कहा गया है।

कुछ राज्यों के कानून बनाने के बाद हमने भी इस दिशा में सोचना प्रारंभ किया है। ...तो फिर अध्यादेश का विकल्पभाजपा प्रदेश कोर समिति और कार्यकारिणी की बेलगावी में शुक्रवार व शनिवार को होने वाली बैठक में भी दोनों विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार पार्टी चाहती है कि अगर शीतकालीन अधिवेशन के दौरान दोनों विधेयक पारित नहीं हो पाए तो अधिवेशन के बाद अध्यादेश जारी किया जाए।

Sanjay Kulkarni Reporting
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