ग्रीन कॉरिडोर : 10 साल की बच्ची, 40 की महिला को मिली नई जिंदगी

Ram Naresh Gautam

Publish: Mar, 14 2018 05:11:35 PM (IST)

Bengaluru, Karnataka, India
ग्रीन कॉरिडोर : 10 साल की बच्ची, 40 की महिला को मिली नई जिंदगी

एक ही दिन में दो हृदय प्रत्यारोपण

बेंगलूरु. शहर के दो निजी अस्पतालों से दो धड़कते हृदय को प्रत्यारोपण के लिए समय पर एक अन्य निजी अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहनों से खचाखच भरी सड़क मंगलवार सुबह करीब 8.30 बजे कुछ समय के लिए सुनसान हो गई। सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात योजना) कासिम रजा की अगुवाई में यातायात विभाग ने ग्रीन कॉरिडोर बना एम्बुलेंस को रास्ता दिया। धड़कते हृदय को लेकर हवा से बातें करती एम्बुलेंस ने एक के बाद एक कई ग्रीन सिग्नल पार किए और चालक ने हृदय को रिकार्ड समय में नारायण हेल्थ सिटी पहुंचा दिया। जहां पहले से ही तैयार चिकित्सकों की टीम ने एक हृदय को एक 10 वर्षीय बच्ची राधिका (काल्पनिक नाम) व दूसरे हृदय को 40 वर्षीय महिला कविता (काल्पनिक नाम) के शरीर में सफलतापूर्ण प्रत्यारोपित कर दोनों को नई जिंदगी दी।
दोनों दिल की बीमारी डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी से जूझ रहे थे। जान बचाने का एक मात्र विकल्प था हृदय प्रत्यारोपण। राधिका के पास अब जो दिल है वो 10 साल के रोहन (काल्पनिक नाम) का है।
चिकित्सकों के अनुसार रोहन मागड़ी का रहने वाला है। वो शुक्रवार को नागमंगला इलाके में एक सड़क दुर्घना का शिकार हो गया था। जिसके बाद उसे आदिचुंचनगिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में भर्ती कराया गया, बाद में उसे केंगरी के बीजीएस अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। उसे बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों ने सोमवार रात उसे बे्रन डेड प्रमाणित किया। अंगदान के लिए समझाने पर परिजन दान के लिए मान गए। धड़कते हृदय के साथ एम्बुलेंस ने अस्पताल से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित नारायण हेल्थ सिटी तक की दूरी करीब 26 मिनट में तय की।
दूसरे मामले में कविता के शरीर में जिंदगी बन धड़क रहा दिल ४१ वर्षीय नर्स गीता का है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भगीरथ रघुरमन ने बताया कि गीता शनिवार को अपने पति के साथ बाइक पर मंदिर जा रही थी, लेकिन हेसरघट्टा के निकट मदुरई सड़क पर बाइक दुर्घटनागस्त हो गई। गीता गंभीर रूप से घायल हो गई। कोलंबिया एशिया अस्पताल में उसका उपचार जारी था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों ने उसे भी सोमवार रात ब्रेन डेड प्रमाणित किया। जिसके बाद गीता के पति ने दूसरों को जिंदगी देने के लिए गीता के हृदय को दान कर दिया। एम्बुलेंस ने अस्पताल से करीब 23.5 किलोमीटर दूर स्थित नारायण हेल्थ सिटी तक की दूरी करीब 29 मिनट में तय की। धड़कते हृदय को समय रहते अस्पताल पहुंचाया। पहले भी कई बार ग्रीन कॉरिडोर बन चुका है।

प्रत्योरापण ही था एकमात्र विकल्प
हृदय की बीमारी डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण कुंदापुर निवासी राधिका का दिल बेहद कमजोर हो गया था। दवाओं का भी असर नहीं हो रहा था। हृदय प्रत्यारोपण एक मात्र विकल्प था। राधिका जैसे कई बच्चे हृदय दान के इंतजार में हैं। रोहन के जाने का उन्हें दुख है, लेकिन रोहन का हृदय अब राधिका की जिंदगी बना है।
डॉ. श्रीशा एम, बाल हृदय रोग विशेषज्ञ, नारायण हेल्थ सिटी

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