अलौकिक व्यक्तित्व के धनी थे गुरु चौथमल

गुरु दिवाकर जैन संघ के सच्चे दिवाकर थे तीर्थेशऋषि
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा न लिया आशीर्वाद

बेंगलूरु. महावीर धर्मशाला में उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि, अनुष्ठान आराधिका साध्वी कुमुदलता आदि ठाणा 4, जैन सिद्धांतचार्या प्रतिभाश्री आदि ठाणा 4 के सान्निध्य में जैन दिवाकर चौथमल का 142 वां जन्मोत्सव एवं गुरुणी कमलावती की पुण्यतिथि का आयोजन हुआ। उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि के शिष्य तीर्थेशऋषि ने कहा कि वह दिवाकर ऐसा सूर्य था जिसने भूत भी संवारा, वर्तमान और भविष्य भी। सचमुच वे जैन संघ के सच्चे दिवाकर थे। प्राणी मात्र को जिन्होंने इस उत्तम धर्म से जोडऩे का कार्य किया। उनके सानिध्य में सभी धर्म की भावना से ओतप्रोत हो जाते थे।
साध्वी कुमुदलता ने कहा कि गुरु दिवाकर अलौकिक व्यक्तिव के धनी थे। गुरु चौथमल ने समस्त समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। जिनके सानिध्य में अधर्मी लोग धर्म के स्वरूप को जानने लग गए। उनकी प्रवचन शैली अद्भुत थी। उन्होंने पाप, पुण्य व धर्म का स्वरूप सुंदर ढंग से लोगों को समझाया। उनका चातुर्य जर्बदस्त था। उन्होंने गुरुणी कमलावती की पुण्यतिथि पर उनका भी गुणानुवाद किया।
साध्वी प्रतिभाश्री ने 'जैनम जयती शासनमÓ गीत से शुरुआत करते हुए गुरु स्मरण में कहा कि गुरु दिवाकर जन जन की आस्था के केंद्र थे। राजा और रंक दोनो उनकी सेवा में श्रद्धा से आकर आशीर्वाद लेते थे। साध्वी महाप्रज्ञा एवं साध्वी डॉ. पद्मकीर्ति ने गुरु भक्ति में गीतों के माध्यम से गुरुगुणगान किया।
साध्वी प्रतिभाश्री की शिष्या प्रेक्षाश्री ने कहा कि वे जैन एकता के प्रबल अग्रदूत, वे भक्तों के भगवान थे। साध्वी राजकीर्ति के निर्देशन में नन्हें मुन्ने बच्चों ने आकर्षक नृत्य द्वारा सुंदर नाटिका की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने संत-सतीवृंद से आशीर्वाद लिया और जैन धर्म, जैन संस्कृति की श्रद्धा भक्ति भाव की सराहना की। इस आयोजन के लाभार्थी पन्नालाल, भरतकुमार, रौनक, दिव्यांश, अक्षत पगारिया कोठारी परिवार, मुख्य अतिथि माणकचंद तालेड़़ा, अशोक नाहर, राजेश नाहर,विशिष्ट अतिथि शांतिलाल चौरडिय़ा, पारसमल बोहरा, विमलचंद खाबिया व चेन्नई , हैदराबाद व अन्य नगरों से अन्य अतिथियों का अभिनंदन समिति की ओर से किया। लाभार्थी पन्नालाल कोठारी परिवार की ओर से स्वर्ण व रजत सिक्के प्रदान किए गए। नवरतनमल गुंदेचा, प्रदीप सुराणा, वैरागन पायल जैन, मांगीलाल बोहरा, गौतम धारीवाल, जंबुकुमार दुग्गड़, किशनलाल कोठारी,अविनाश लोढ़ा, ज्ञानचंद लोढ़ा, पारसमल गोलेछा, पुखराज आंचलिया, अविनाश लोढ़ा व अन्य ने अपने विचार रखे। धर्मसभा का संचालन अशोककुमार गादिया ने किया। आभार अशोक रांका ने जताया।

Yogesh Sharma
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